बगैर मंगल वाले वर-वधू की शादी हो सकती है
एकादशमेश मंगल लग्न में हो तो मंगल दोष नहीं लगे
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पत्नी या पति तेजस्वी स्वभाव के होते हैं। आयु उत्तम होती है। लग्न के साथ सूर्य हो तो ऐसे जातक को मित्रों, भाइयों का पूर्ण सहयोग मिलता है। शत्रु नहीं होते हैं, पराक्रमी होता है। चंद्र साथ में होने पर कुंडली में समस्त दोषों का निवारण होता है। ऐसा जातक धन-कुटुम्ब से पूर्ण होता है। वाक् शक्ति अच्छी होती है। बुध साथ हो तो ऐसा जातक सफल व्यापारी, राजनीतिज्ञ भी हो सकता है। इसमें हिम्मत गजब की होती है।
गुरु साथ होने पर गणितज्ञ और ज्ञानवान होता है। ऐसे जातक अपने जीवनसाथी के प्रति वफादार होते हैं, मंगल दोष नहीं होता है। शुक्र साथ होने पर ऐसे जातक सेक्सी होते हैं और उनके संबंध अन्यत्र भी हो सकते हैं। वे विद्या और लेखन में अच्छे होते हैं। शनि साथ हो तो आय में कमी, शत्रु से परेशान, स्वयं मेहनत करने पर भी सफलता नहीं मिलती। ऐसी स्थिति में मंगल का उपाय व सोना-चाँदी-ताँबे के तारों में गुँथी हुई अँगूठी बनावाकर पहनें। राहु साथ होने पर सफल राजनीतिज्ञ बन सकता है। ऐसे जातक चतुर चालाक भी होते हैं।
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केतु साथ हो तो जीवन में एक बार एक्सीडेंट होता है या सिर पर चोट आदि लगती है। एकादशेश मंगल द्वितीय भाव में हो तो उस जातक का धन कुटुम्बी लोग हजम कर जाते हैं या शेयर आदि में हो तो धन नष्ट हो जाता है। वाणी के भी कड़क होते हैं। सूर्य साथ होने पर वाणी दोष संभव है। पराक्रम द्वारा थोड़ी सफलता मिलती है।
चंद्र साथ हो तो मंगल का नीच भंग होने से ऐसे जातक धनवान होते हैं। वाणी मधुर लेकिन सख्त होती है। बुध साथ हो तो अपने बल पर कुटुम्ब का सहयोग करने वाले होते हैं। गुरु साथ होने पर राज्य कृपा, पिता से लाभ होता है। शुक्र साथ हो तो आवाज मधुर होती है, ऐसे जातक गायन में सफल हो सकते हैं।
शनि साथ हो तो जीवनसाथी को खतरा होता है। कुटुम्बियों से नहीं बनती है। धन की बचत नहीं होती है। आँखों की ज्योति कम हो जाती है या चोट लगती है। राहु साथ हो तो अनावश्यक परेशानियाँ आती हैं।
कभी-कभी तो जेल भी जाना पड़ सकता है। केतु साथ होने पर आँखों में चोट लगती है। कुटुम्बियों से अनबन रहती है। एकादशेश मंगल तृतीय में हो तो ऐसे जातक के शत्रु नहीं होते। वो बड़ा पराक्रमी, साहसी, महत्वाकांक्षी होता है। भाई अधिक होते हैं। मंगल साथ सूर्य हो तो स्वप्रयत्नों से ऊँचाइयों पर पहुँचता है। भाइयों, मित्रों का लाभ पाने वाला, शत्रुहंता होता है।
चंद्र साथ हो तो शत्रु पर शांति नीति से सफल होता है व गुणी होकर आवाज मधुर होती है। बुध साथ हो तो माता, भूमि, भवन में स्वप्रयत्नों से लाभ पाने वाला होता है। मान-प्रतिष्ठा बढ़ती है। गुरु साथ होने पर पत्नी या पति साहसी, उत्तम चरित्र वाले होते हैं। आर्थिक दृष्टि से सबल होते हैं। शुक्र साथ हो तो सुंदर होने के साथ विद्या उत्तम होती है।
शनि साथ होने पर भाई, मित्र, पड़ोसियों से नहीं बनती। आय में भी कमी रहती है। राहु साथ हो तो शत्रु न हो। गुप्त युति से लाभ मिले। केतु साथ हो तो भाई-भाई में न बने। अलग रहना पड़े। एकादशेश मंगल चतुर्थ के हो तब भी मांगलिक पत्रिका नहीं मानी जाएगी क्योंकि मंगल की चतुर्थ दृष्टि सप्तम भाव पर मित्र पड़ेगी, वहीं सप्तम दशक भाव पर मित्र और एकादश भाव पर स्वदृष्टि पड़ेगी। अत: ऐसे जातक की आय जनता से संबंधित कार्यों से होती है और मकान का सुख उत्तम रहता है। आय भी अच्छी रहती है। पिता व राज्य से लाभ मिलता है।
मंगल के साथ सूर्य हो तो स्थानीय राजनीति में सफल होता है। भाइयों का साथ अच्छा रहता है। मान-प्रतिष्ठा पाने वाला होता है। चंद्र साथ हो तो धन-कुटुम्ब से पूर्ण होता है। माता से लाभ और जनता से संबंधित कार्यों में सफलता मिलती है। बुध साथ हो तो स्थानीय राजनीति में, विधायक में सफलता पाता है।
व्यापार में हो तो सफल व्यापारी होता है। गुरु साथ हो तो पिता से, शासकीय सर्विस में, राजनीति में सफल होता है। सास-ससुर से भी लाभ, व्यापार में उन्नति हो ऐसे जातक हीरा पहने तो अच्छा होता है। शनि साथ हो तो माता न हो, स्थानीय कार्यों में क्षति, मकान न हो। राहु साथ होने पर राजनीति में सफल हो। केतु साथ हो तो माता का साथ न रहे।

