कभी-कभी तो जेल भी जाना पड़ सकता है। केतु साथ होने पर आँखों में चोट लगती है। कुटुम्बियों से अनबन रहती है। एकादशेश मंगल तृतीय में हो तो ऐसे जातक के शत्रु नहीं होते। वो बड़ा पराक्रमी, साहसी, महत्वाकांक्षी होता है। भाई अधिक होते हैं। मंगल साथ सूर्य हो तो स्वप्रयत्नों से ऊँचाइयों पर पहुँचता है। भाइयों, मित्रों का लाभ पाने वाला, शत्रुहंता होता है।
चंद्र साथ हो तो शत्रु पर शांति नीति से सफल होता है व गुणी होकर आवाज मधुर होती है। बुध साथ हो तो माता, भूमि, भवन में स्वप्रयत्नों से लाभ पाने वाला होता है। मान-प्रतिष्ठा बढ़ती है। गुरु साथ होने पर पत्नी या पति साहसी, उत्तम चरित्र वाले होते हैं। आर्थिक दृष्टि से सबल होते हैं। शुक्र साथ हो तो सुंदर होने के साथ विद्या उत्तम होती है।
शनि साथ होने पर भाई, मित्र, पड़ोसियों से नहीं बनती। आय में भी कमी रहती है। राहु साथ हो तो शत्रु न हो। गुप्त युति से लाभ मिले। केतु साथ हो तो भाई-भाई में न बने। अलग रहना पड़े। एकादशेश मंगल चतुर्थ के हो तब भी मांगलिक पत्रिका नहीं मानी जाएगी क्योंकि मंगल की चतुर्थ दृष्टि सप्तम भाव पर मित्र पड़ेगी, वहीं सप्तम दशक भाव पर मित्र और एकादश भाव पर स्वदृष्टि पड़ेगी। अत: ऐसे जातक की आय जनता से संबंधित कार्यों से होती है और मकान का सुख उत्तम रहता है। आय भी अच्छी रहती है। पिता व राज्य से लाभ मिलता है।
मंगल के साथ सूर्य हो तो स्थानीय राजनीति में सफल होता है। भाइयों का साथ अच्छा रहता है। मान-प्रतिष्ठा पाने वाला होता है। चंद्र साथ हो तो धन-कुटुम्ब से पूर्ण होता है। माता से लाभ और जनता से संबंधित कार्यों में सफलता मिलती है। बुध साथ हो तो स्थानीय राजनीति में, विधायक में सफलता पाता है।
व्यापार में हो तो सफल व्यापारी होता है। गुरु साथ हो तो पिता से, शासकीय सर्विस में, राजनीति में सफल होता है। सास-ससुर से भी लाभ, व्यापार में उन्नति हो ऐसे जातक हीरा पहने तो अच्छा होता है। शनि साथ हो तो माता न हो, स्थानीय कार्यों में क्षति, मकान न हो। राहु साथ होने पर राजनीति में सफल हो। केतु साथ हो तो माता का साथ न रहे।
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