सुंदर सौभाग्य का वरदान देता है हरतालिका तीज व्रत


हरतालिका व्रत श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को हस्त नक्षत्र के दिन रखा जाता है। इस दिन कुमारी और सौभाग्यवती स्त्रियां मां पार्वती और शिवजी का पूजन करती हैं। कुमारी कन्याएं मनचाहा वर पाने की कामना से और विवाहित स्त्रियां अपने सुहाग को अखंड बनाए रखने के लिए हरतालिका व्रत करती हैं।

ALSO READ:
कैसे करें हरतालिका तीज व्रत, पढ़ें पूजन विधि


इस व्रत के सुअवसर पर सौभाग्यवती स्त्रियां नए लाल वस्त्र पहनकर, मेंहदी लगाकर सोलह श्रृंगार करती हैं और प्रदोष काल में शुभ मुहूर्त में भगवान शिव और पार्वती का पूजन करती हैं। हरतालिका व्रत कथा सुनती हैं। शिवपुराण की कथानुसार इस पावन व्रत को सबसे पहले राजा हिमाचल की पुत्री माता पार्वती ने भगवान शिव को पतिरूप में पाने के लिए किया था।

ALSO READ:को हरतालिका तीज व्रत, यह है पूजा का शुभ मुहूर्त

जब राजा हिमाचल ने पार्वती का विवाह शिव से करने से मना कर दिया था तो पार्वती की सहेलियां उनका हरण करके उन्हें जंगल में ले गईं और वहां मां पार्वती ने विधि-विधान से इस व्रत को किया। मां पार्वती ने निर्जल रहकर वन में मिलने वाले फल-फूल से भगवान शिव की आराधना की। उनके तप से प्रसन्ना होकर भगवान शंकर ने उन्हें अपनी अर्द्धांगिनी बनाया और तभी से इस व्रत की महत्ता स्थापित हो गई। हिमाचल ने बहुत खोजा और पार्वती का कहीं पता नहीं चला। जब शिव से वरदान पाने के बाद माता पार्वती हिमाचल को मिली तो उन्होंने इतनी कठोर तपस्या का कारण पूछा।

ALSO READ:के नियम, पढ़ें 12 काम की बातें

मां पार्वती ने अपने मन की बात कही और पुत्री के हठ के आगे राजा हिमाचल को झुकना पड़ा। जिस तरह माता-पार्वती ने इस व्रत को किया था उसी तरह इस व्रत को स्त्रियां करके शिव-गौरी कृपा प्राप्त कर सकती हैं। इस व्रत में बालू की रेत से शिव-गौरी बनाकर, फल-फूल से पूजन किया जाता है। इस व्रत की रात्रि स्त्रियां रतजगा करती हैं।
यह अत्यधिक कठिन व्रत माना गया है और जो स्त्रियां इसका संकल्प लेती हैं वे फिर हर वर्ष इसे पूरे मनोयोग से निभाती हैं। इस व्रत का नियम है कि इसे प्रारंभ करने के बाद छोड़ा नहीं जाता है। जिस घर में हरतालिका व्रत का पूजन होता है वहां इसकी पूजा का खंडन नहीं किया जाता है और इसे परंपरा के रूप में प्रतिवर्ष ही मनाया जाता है।

इस तरह करें पूजन

- इस व्रत में प्रदोषकाल में शिव-पार्वती का पूजन किया जाता है।
- हरतालिका पूजन के लिए शिव, पार्वती और गणेशजी की बालू रेत की प्रतिमा बनाई जाती है और उसका पूजन किया जाता है।

- भगवान शंकर को फल-फूल अर्पित करते हैं।

- यह व्रत निर्जला रहकर किया जाता है।

- अंत में सभी सामग्री को एकत्र कर पवित्र नदी एवं कुंड में विसर्जित कर दिया जाता है।


वेबदुनिया हिंदी मोबाइल ऐप अब iOS पर भी, डाउनलोड के लिए क्लिक करें। एंड्रॉयड मोबाइल ऐप डाउनलोड करने के लिए क्लिक करें। ख़बरें पढ़ने और राय देने के लिए हमारे फेसबुक पन्ने और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं।

और भी पढ़ें :

ज्योतिष के अनुसार मंगल की खास विशेषताएं, जो आप नहीं जानते ...

ज्योतिष के अनुसार मंगल की खास विशेषताएं, जो आप नहीं जानते होंगे...
ज्योतिष के अनुसार हर ग्रह की परिभाषा अलग है। पौराणिक कथाओं में नौ ग्रह गिने जाते हैं, ...

विवाह के प्रकार और हिंदू धर्मानुसार कौन से विवाह को मिली है ...

विवाह के प्रकार और हिंदू धर्मानुसार कौन से विवाह को मिली है मान्यता, जानिए
शास्त्रों के अनुसार विवाह आठ प्रकार के होते हैं। विवाह के ये प्रकार हैं- ब्रह्म, दैव, ...

कृष्ण के 80 पुत्रों का रहस्य, साम्ब के कारण हुआ मौसुल युद्ध

कृष्ण के 80 पुत्रों का रहस्य, साम्ब के कारण हुआ मौसुल युद्ध
भगवान श्रीकष्ण ने आठ महिलाओं से विधिवत विवाह किया था। इन आठ महिलाओं से उनको 80 पुत्र मिले ...

गुलाब का एक फूल बदल सकता है जीवन की दिशा, जानिए 10 रोचक ...

गुलाब का एक फूल बदल सकता है जीवन की दिशा, जानिए 10 रोचक टोटके
हम आपके लिए लाए हैं सुंगधित गुलाब के फूल के कुछ ऐसे उपाय या टोटके जिन्हें आजमाकर आप अपने ...

आखिर क्यों होती हैं हमारे कामों में देरी, जानिए, क्या कहता ...

आखिर क्यों होती हैं हमारे कामों में देरी, जानिए, क्या कहता है ज्योतिष
जानते हैं कि जन्मपत्रिका में वे कौन सी ऐसी ग्रहस्थितियां व ग्रह होते हैं जो कार्यों में ...

रावण की पत्नी मंदोदरी ने क्यों किया वि‍भीषण से विवाह?

रावण की पत्नी मंदोदरी ने क्यों किया वि‍भीषण से विवाह?
पुलस्त्य ऋषि के पुत्र और महर्षि अगस्त्य के भाई महर्षि विश्रवा ने राक्षसराज सुमाली और ...

ऐसे दें अपने घर को एस्ट्रो टच

ऐसे दें अपने घर को एस्ट्रो टच
घर सजा कर रखना किसे पसंद नहीं होता लेकिन यदि घर कि सजावट ज्योतिष व एस्ट्रो के अनुरुप हो ...

गायत्री मंत्र का सरल और गोपनीय अर्थ हिन्दी में, खास आपके ...

गायत्री मंत्र का सरल और गोपनीय अर्थ हिन्दी में, खास आपके लिए...
समस्त धर्म ग्रंथों में गायत्री की महिमा एक स्वर से कही गई। समस्त ऋषि-मुनि मुक्त कंठ से ...

गायत्री जयंती : कौन हैं गायत्री माता, कैसे हुआ अवतरण, विवाह ...

गायत्री जयंती : कौन हैं गायत्री माता, कैसे हुआ अवतरण, विवाह और महिमा
मां गायत्री की कृपा से ब्रह्मा जी ने गायत्री मंत्र की व्याख्या अपने चारों मुखों से चार ...

करोड़ पल सोने के दान का फल देती है निर्जला एकादशी, पढ़ें ...

करोड़ पल सोने के दान का फल देती है निर्जला एकादशी, पढ़ें पौराणिक व्रत कथा...
निर्जला एकादशी व्रत की कथा इस प्रकार है- भीमसेन व्यासजी से कहने लगे कि हे पितामह! भ्राता ...

राशिफल