गुरु पूर्णिमा के दिन जानिए महाभारत के दूसरे कृष्ण के 12 रहस्य

vedvyas
अनिरुद्ध जोशी|



आषाढ़ की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा कहते हैं। इस दिन व्यास पूजा होती है। का मूल नाम द्वैपायन था। उन्होंने ही वेदों के भाग किए थे इसलिए उन्हें वेद व्यास कहा गया। उन्होंने ही पुराण एवं ब्रह्मसूत्रों को लिखा है। संस्कृत साहित्य में वाल्मीकि के बाद व्यास ही सर्वश्रेष्ठ कवि हुए हैं। ग्रंथ के रचयिता वेद व्यास को दूसरा कृष्‍ण कहा जाता है। महाभारत में वेद व्यास की कई महत्वपूर्ण घटनाक्रमों में उपस्थिति रही है। कहते हैं कि श्रीकृष्ण द्वैपायन 28वें वेद व्यास थे। भगवान वेद व्यास एक अलौकिक शक्तिसंपन्न महापुरुष थे। आओ जानते हैं उनके बारे में महत्वपूर्ण 10 तथ्‍य।
1. ऋषि पराशर और निषाद कन्या सत्यवती के पुत्र महर्षि वेद व्यास जन्म लेते ही युवा हो गए और तपस्या करने द्वैपायन द्वीप चले गए। तप से वे काले हो गए इसलिए उन्हें कृष्ण द्वैपायन कहा जाने लगा। यह भी कहा जाता है कि उनका जन्म यमुना नदी के बीच एक द्वीप पर हुआ था और वे सांवले थे इसलिए उनका नाम कृष्ण द्वैपायन रखा गया।

2. सत्यवती महाराजा शांतनु की दूसरी पत्नी थीं और चित्रांगद एवं विचित्रवीर्य उनके 2 पुत्र थे। इसमें से अविवाहित चित्रांगद युद्ध में मारा गया जबकि विवाहित विचित्रवीर्य रोगवश मृत्यु को प्राप्त हुआ।
3. सत्यवती के कहने पर वेद व्यास ने विचित्रवीर्य की पत्नी अम्बालिका और अम्बिका से नियोग किया जिससे धृतराष्ट्र और पांडु नामक पुत्र हुए और एक दासी से विदुर का जन्म होता है। इन्हीं 3 पुत्रों में से एक धृतराष्ट्र के यहां जब कोई पुत्र नहीं हुआ तो वेद व्यास की कृपा से ही 99 पुत्र और 1 पुत्री का जन्म हुआ।

4. श्रीमद्भागवत पुराण में भगवान विष्णु के जिन 24 अवतारों का वर्णन है, उनमें महर्षि वेद व्यास का भी नाम है।
5. धर्मग्रंथों में जो अष्ट चिरंजीवी (8 अमर लोग) बताए गए हैं, महर्षि वेद व्यास भी उन्हीं में से एक हैं इसलिए इन्हें आज भी जीवित माना जाता है।

6. महाभारत के अंत में जब अश्‍वत्थामा ब्रह्मास्त्र छोड़ देता है तो उसके ब्रह्मास्त्र को वापस लेने के लिए वेद व्यास अनुरोध करते हैं। लेकिन अश्‍वत्‍थामा वापस लेने की विद्या नहीं जानता था तो उसने उस अस्त्र को अभिमन्यु की पत्नी उत्तरा के गर्भ में उतार दिया था। इस घोर पाप के चलते श्रीकृष्ण उसे 3,000 वर्ष तक कोढ़ी के रूप में भटकने का शाप दे देते हैं जिस शाप का वेद व्यास भी अनुमोदन करते हैं।
7. महर्षि वेद व्यास ने जब कलयुग का बढ़ता प्रभाव देखा तो उन्होंने ही पांडवों को स्वर्ग की यात्रा करने की सलाह दी थी।

8. महर्षि वेद व्यास ने ही महाभारत का युद्ध देखने के लिए संजय को दिव्य दृष्टि प्रदान की थी जिससे संजय ने धृतराष्ट्र को पूरे युद्ध का वर्णन महल में ही सुनाया था।

9. पृथ्वी का पहला भौगोलिक मानचित्र महाभारत के रचयिता महर्षि वेद व्यास द्वारा बनाया गया था। हे कुरुनंदन! सुदर्शन नामक यह द्वीप चक्र की भांति गोलाकार स्थित है। जैसे पुरुष दर्पण में अपना मुख देखता है, उसी प्रकार यह द्वीप चंद्रमंडल में दिखाई देता है। इसके 2 अंशों में पिप्पल और 2 अंशों में महान शशक (खरगोश) दिखाई देता है। -वेद व्यास, भीष्म पर्व, महाभारत
10. व्यास पोथी नामक स्थान बद्रीनाथ से 3 क‌िलोमीटर की दूरी पर उत्तराखंड के माणा गांव में स्थित है। यहां महाभारत के रचनाकार महर्षि वेद व्यासजी की गुफा है। इसके समीप ही गणेश गुफा है। मान्यता है कि इसी गुफा में व्यासजी ने महाभारत को मौखिक रूप दिया था और गणेशजी ने उसे लिखा था। जहां यह कथा लिखी गई थी, वह गुफा अलकनंदा और सरस्वती नदी के संगम तट पर मौजूद है।

11. कृष्ण द्वैपायन वेद व्यास की पत्नी का नाम आरुणी था जिनके महान बालयोगी पुत्र शुकदेव थे। वेद व्यास के 4 महान शिष्य थे जिनको उन्होंने 4 वेद पढ़ाए- मुनि पैल को ॠग्वेद, वैशंपायन को यजुर्वेद, जैमिनी को सामवेद तथा सुमंतु को अथर्ववेद पढ़ाया।
12. एक बार वेद व्यास वन में धृतराष्ट्र और गांधारी से मिलने गए, तब वहां युधिष्ठिर भी उपस्थित थे। धृतराष्ट्र ने व्यासजी से अपने मरे हुए कुटुम्बियों और स्वजनों को देखने की इच्छा प्रकट की। तब महर्षि व्यास सभी को लेकर गंगा तट पर पहुंचे। वहां व्यासजी ने दिवंगत योद्धाओं को पुकारा। कुछ देर बार ही जल में से देखते-ही-देखते भीष्म और द्रोण के साथ दोनों पक्षों के योद्धा निकल आए। वे सभी लोग रात्रि में अपने पूर्व संबंधियों से मिले और सूर्योदय से पूर्व पुन: गंगा में प्रवेश करके अपने दिव्य लोकों को चले गए।

 

और भी पढ़ें :