नरेन्द्र मोदी : एक योद्धा, जिसे हारना मंजूर नहीं

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उत्तर गुजरात के महेसाणा जिले में स्थित एक छोटे से गांव वडनगर में सितंबर, 1950 को जन्मे नरेन्द्र मोदी का लालन-पालन एक ऐसे माहौल में हुआ, जिनसे उन पर उदारता, परोपकार और सामाजिक सेवा जैसे मूल्यों का प्रभाव पड़ा। साठ के दशक के मध्य में भारत-पाक युद्ध के दौरान कम उम्र होने के बावजूद उन्होंने रेलवे स्टेशनों पर आवागमन के दरमियान सैनिकों की स्वैच्छिक सेवा की थी। 1967 में उन्होंने गुजरात के बाढ़ पीड़ितों की सेवा की थी। उत्कृष्ट संगठनात्मक सामर्थ्य और मनोविज्ञान की गहरी समझ होने की वजह से उन्होंने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) में अपनी सेवाएं दी थीं और गुजरात के अलग-अलग सामाजिक-राजनैतिक आंदोलनों में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की थी।
किशोरावस्था के दिनों से ही उन्हें अनेक मुश्किलों और तकलीफों का सामना करना पड़ा था, लेकिन अपने सशक्त व्यक्तित्व और साहस की बदौलत उन्होंने प्रत्येक चुनौतियों को अवसर में तब्दील कर दिखाया। विशेषकर, जब उन्होंने उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए महाविद्यालय एवं विश्वविद्यालय में प्रवेश लिया, तब उनकी राह कठिन संघर्ष और पीड़ादायी परिश्रम से भरी पड़ी थी। लेकिन, जीवन संग्राम में वे हमेशा एक योद्धा, एक सच्चे सैनिक की भांति रहे। एक बार कदम बढ़ाने के बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। हार मानना या पराजित होना उन्होंने कभी स्वीकार नहीं किया। अपने इसी दृढ़निश्चय की वजह से उन्होंने राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर की शिक्षा पूरी की।> > भारत के सामाजिक एवं सांस्कृतिक विकास पर ध्यान केन्द्रित करने वाले संगठन, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संगठन (आरएसएस) से उन्होंने शुरुआत की और निःस्वार्थता, सामाजिक जवाबदारी, समर्पण एवं राष्ट्रवाद की भावना को आत्मसात किया। आरएसएस में अपने कार्यकाल के दौरान नरेन्द्र मोदी ने 1974 के भ्रष्टाचार विरोधी नवनिर्माण आंदोलन और 19 महीने (जून 1975 से जनवरी 1977) की दीर्घावधि तक रहे भयंकर ‘आपातकाल’, जब भारतीय नागरिकों के मूल अधिकारों का गला घोंट दिया गया था, जैसी विभिन्न घटनाओं के वक्त अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई। इस पूरे समयकाल के दौरान भूमिगत रहते हुए मोदी ने गुप्त तरीके से केन्द्र सरकार की फासीवादी नीतियों के खिलाफ जोशीले अंदाज में जंग छेड़ते हुए लोकतंत्र की भावना को जीवित रखा।
1987 में भाजपा में शामिल होकर उन्होंने राजनीति की मुख्य धारा में प्रवेश किया। एक वर्ष के भीतर ही उन्हें पार्टी की गुजरात इकाई का महामंत्री नियुक्त किया गया। तब तक उन्होंने एक अत्यंत कुशल संगठक के रूप में ख्याति अर्जित कर ली थी। उन्होंने सच्चे अर्थों में पार्टी कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने के चुनौतीपूर्ण कार्य का बीड़ा उठाया, जिसकी वजह से पार्टी को राजनीतिक लाभ मिलना शुरू हो गया और अप्रैल, 1990 में केन्द्र में गठबंधन सरकार अस्तित्व में आई। यह राजनीतिक गठबंधन कुछ महीनों के अंतराल के बाद टूट गया, लेकिन 1995 में भाजपा अपने दम पर गुजरात में दो-तिहाई बहुमत के साथ सत्ता हासिल करने में सफल रही। तब से गुजरात में सत्ता की बागडोर भाजपा के हाथों में है।

1988 से 1995 के दौरान नरेन्द्र मोदी की पहचान एक कुशल रणनीतिकार के रूप में स्थापित हुई, जिन्होंने गुजरात भाजपा को राज्य में सत्ताधारी पार्टी बनाने के लिए जमीनी कार्य को सफलतापूर्वक अंजाम दिया था। इस दौरान, मोदी को दो महत्वपूर्ण राष्ट्रीय घटनाओं के आयोजन की जिम्मेदारी सौंपी गई। एक, लालकृष्ण आडवाणी की सोमनाथ से अयोध्या तक की लंबी रथयात्रा और दूसरी, देश के दक्षिणी छोर पर स्थित कन्याकुमारी से उत्तर में कश्मीर तक की यात्रा। 1998 में नई दिल्ली की सत्ता में भाजपा के उदय का श्रेय इन्हीं दो अत्यंत सफल घटनाओं को जाता है, जिसमें मोदी की भूमिका महत्वपूर्ण रही थी।

1995 में उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय सचिव नियुक्त किया गया और देश के पांच महत्वपूर्ण राज्यों की जिम्मेवारी सौंपी गई, जो किसी भी युवा नेता के लिए बड़ी उपलब्धि की बात थी। 1998 में उन्हें महासचिव (संगठन) के पद पर पदोन्नत किया गया। अक्टूबर, 2001 में भारत के सबसे समृद्ध और प्रगतिशील राज्यों में से एक गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में नियुक्त होने तक वे अपनी सेवाएं महासचिव के तौर पर पार्टी को देते रहे। राष्ट्रीय स्तर पर उनके कार्यकाल के दौरान मोदी को जम्मू एवं कश्मीर जैसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण राज्य के अलावा उतने ही संवदनशील उत्तर-पूर्वी राज्यों सहित अन्य कई राज्यों में पार्टी की प्रदेश इकाइयों के मामलों को देखने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राष्ट्रीय स्तर पर कार्य करने के दौरान मोदी पार्टी के एक महत्वपूर्ण प्रवक्ता के तौर पर उभरकर सामने आए तथा कई महत्वपूर्ण घटनाओं के समय उन्होंने अहम भूमिका निभाई।

इस दौरान उन्होंने दुनियाभर के देशों में यात्राएं की और अनेक प्रतिष्ठित नेताओं के साथ विचार-विमर्श किया। इन अनुभवों से न सिर्फ उनके वैश्विक दृष्टिकोण का विकास हुआ, बल्कि भारत की सेवा करने तथा दुनिया में उसका सामाजिक-आर्थिक वर्चस्व स्थापित करने का जज्बा भी तीव्र बना।

अक्टूबर, 2001 में पार्टी ने उन्हें गुजरात सरकार की कमान संभालने को कहा। 7 अक्टूबर, 2001 को जब मोदी ने शपथ ग्रहण की, तब गुजरात जनवरी, 2001 में आए विनाशक भूकंप सहित अन्य कई प्राकृतिक आपदाओं के विपरीत प्रभावों से गुजर रहा था। हालांकि, कुशल रणनीतिकार नरेन्द्र मोदी ने अपने राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय अनुभवों का लाभ उठाते हुए से इन समस्याओं का पूरे जोश के साथ सामना करने का निश्चय किया।

भूकंप प्रभावित इलाकों के पुनर्निर्माण और पुनर्वास की कार्रवाई की बड़ी चुनौती उनके सामने थी। भुज मलबों का शहर बन गया था और हजारों लोग कामचलाउ आश्रय स्थानों में बिना किसी मूलभूत सुविधाओं के रह रहे थे। नरेन्द्र मोदी ने प्रतिकूल परिस्थितियों को किस तरह सर्वांगीण विकास के अवसरों में तब्दील कर दिया, भुज शहर उसका जीता-जागता सबूत है।

उनके नेतृत्व में शिक्षा, कृषि और स्वास्थ्य सेवा सहित अनेक क्षेत्रों में बड़ा परिवर्तन नजर आ रहा है। उन्होंने राज्य के भविष्य के लिए अपनी एक स्पष्ट दृष्टि बनाते हुए नीति आधारित सुधार कार्यक्रम शुरू किया। सरकार के ढांचे को पुनर्गठित कर गुजरात को सफलतापूर्वक समृद्धि के मार्ग पर ला दिया। उनके आशय और क्षमता का पता उनके सत्ता संभालने के 100 दिनों के भीतर ही चल गया। अपनी प्रशासनिक सूझबूझ, दूरदर्शिता की वजह से दिसम्बर 2002 के आम चुनावों में भव्य विजय हासिल की और मोदी सरकार 182 सीटों वाली विधानसभा में 128 सीटें जीतकर भारी बहुमत के साथ चुन ली गई। 2007 के चुनावों में भी फिर से एक बार मोदी के नेतृत्व में भाजपा को भारी बहुमत मिला।

आज गुजरात के लोगों की आशाओं और अपेक्षाओं को उनकी उम्मीदों से भी ज्यादा पूरा किया गया है। आज गुजरात ई- गवर्नेंस, पूंजी निवेश, गरीबी उन्मूलन, बिजली, एसईजेड, सड़क निर्माण, वित्तीय व्यवस्थापन सहित कई क्षेत्रों में अग्रसर है। गुजरात की समृद्धि कृषि, उद्योग और सेवा, तीनों क्षेत्रों के संतुलित विकास की वजह से है। गुजरात के सर्वांगीण विकास में श्री मोदी के सबका साथ सबका विकास मंत्र, उनके प्रो- पीपल प्रो- एक्टीव गुड गवर्नेंस (पी2जी2) सूत्र और विकास कार्यों में गुजरात के लोगों की सक्रिय भागीदारी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

अनेक अवरोध होने के बावजूद उन्होंने संकल्प किया है कि नर्मदा बांध 121.9 मीटर की ऊंचाई तक पहुंचे। उन्होंने इसके निर्माण में अवरोध खड़े करने वालों के खिलाफ उपवास भी किए। गुजरात में जल स्त्रोतों की अनेक ग्रीड बनाने के लिए कार्यरत सुजलाम सुफलाम योजना जल संरक्षण और उसके उचित उपयोग की दिशा में अन्य एक अनोखी पहल है।

सोइल हैल्थ कार्ड, रोमिंग राशन कार्ड की शुरुआत जैसी नयी पहल राज्य के सामान्य से सामान्य व्यक्ति के लिए उनकी चिंता को दर्शाती है। कृषि महोत्सव, चिरंजीवी योजना, मातृ वन्दना, बेटी बचाओ अभियान, ज्योतिग्राम योजना और कर्मयोगी अभियान, ई- ममता, एम- पावर, स्कॉप, आई- क्रिएट जैसी पहलों द्वारा गुजरात का सर्वांगीण विकास सम्भव बना है। आज जब राजनेताओं की नजर आगामी चुनावों से आगे नहीं जाती तब ऐसे कदम श्री नरेन्द्र मोदी को आने वाली पीढ़ी के बारे में सोचने वाले एक राजनेता के तौर पर प्रस्थापित करती है।

नवीन विचारयुक्त एक युवा और ऊर्जावान जननेता के तौर पर व्यापक रूप में पहचाने जाने वाले श्री नरेन्द्र मोदी ने अपने विचारों को सफलतापूर्वक गुजरात के लोगों तक पहुंचाया और वह गुजरात के 6 करोड़ से ज्यादा लोगों का भरोसा, विश्वास और आशा जगाने में सफल रहे हैं।

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