आयशा अजीज : सपनों का आकाश, हकीकत की उड़ान...


 
जब उड़ने की हो ख्वाहिशें, हौंसलों के पर खुद ब खुद निकल आते हैं, 
अपनों का हो साथ, तो आप खुद को आसमान में पाते हैं 
 
यह पंक्तियां बयां करती हैं आयशा की उड़ान भरने से लेकर आसमान पर राज करने तक के सफर को। यह पंक्तियां बयां करती है, स्त्री के मन में लगे हौंसलों के पर को। और यह पंक्तियां बयां करती हैं उसके दमदार अस्तित्व को, जो धरती से लेकर आसमान तक मौजूद है...उसे बार-बार खुद को साबित करने की अब जरूरत नहीं। बस जरूरत है, तो इस जहां को...उसे पहचानने की। 
 
हम बात कर रहे हैं की, जो लड़ाकू विमान उड़ाने वाली देश की सबसे कम उम्र की होंगी। कश्मीर के बारामूला की आयशा अजीज को 2011 में मात्र 16 साल की उम्र में हाईस्कूल की पढ़ाई के दौरान ही स्टूडेंट पायलट का लाइसेंस मिल गया था और वे देश की सबसे कम उम्र की पायलट बन चुकी थीं।
 
इसके बाद 21 साल की उम्र में उन्हें कमर्शियल पायलट का लाइसेंस मिला और अब आयशा जेट मिग 29 विमान उड़ाने की तैयारी कर रही हैं। इस बारे में रूसी एजेंसी से उनकी बातचीत जारी है और एजेंसी के सहयोग से अगर वे मिग 29 विमान उड़ाती हैं, तो रूस के सोकूल एयरबेस से उड़ान भरकर वे देश की सबसे युवा महिला पायलट कहलाएंगी।
 
बचपन से ही पायलट बनने का सपना संजोए आयशा ने 2012 में अपने इस ख्वाब को साकार करने की ओर पहला कदम बढ़ाया, जब वे मुंबई आईं और फ्लाइंग क्लब में दाखिल हुईं। उनके पिता का इसमें बेहद सराहनीय योगदान रहा, जब बेटी के सपनों को उन्होंने अपनी अनुमति के पंख लगा दिए। सिर्फ एक बार कहने पर आयशा के पिता ने उन्हें फ्लाइंग स्कूल भेजा, और आज वे बेखौफ होकर उत्साह और हौंसले के साथ सेसना-152 और सेसना 172 प्लेन उड़ाती हैं। बॉम्बे फ्लाइंग क्लब से एविएशन में ग्रेजुएशन कर चुकीं अजीत बताती हैं कि ट्रेनिंग के दौरान उन्होंने एक इंजन वाले हवाई जहाज को 200 घंटों तक उड़ाया है।
 
इसके बाद 2012 में नासा से उन्होंने दो महीने का अंतरिक्ष प्रशिक्षण पाठ्यक्रम पूरा किया। उस दौरान वे तीन भारतीयों में चुनी गई थीं, जिसके चलते वे नासा में अपनी रोल मॉडल सुनीता विलियम्स से मिली। भारतीय मूल की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स को वे अपनी प्रेरणास्त्रोत मानती हैं। 
 
प्लेन उड़ाने के अलावा भी आयशा के कुछ शौक हैं, जिसके चलते वे कुछ मैगजीन के पृष्ठ और टीवी विज्ञापन में भी नजर आ चुकी हैं। इस मुकाम को हासिल करना आयशा के लिए आसान नहीं था, लेकिन मेहनत, लगन और अपनों के साथ से आज वे इस ऊंचाई पर पहुंच पाई हैं, जहां लाखों लड़कियों के लिए वे एक आदर्श हैं। आयशा कश्मीर एवं भारतीय महिलाओं एवं युवतियों को जीवन में सपने देखने और उन्हें सच करने के लिए प्रोत्साहित करती हैं। 
 
वे कहती हैं कि अपने जीवन में लक्ष्य बनाएं और उसे पाने के लिए सच्चे दिल से मेहनत करें, लेकिन अपने सपनों को कभी टूटने न दें। महिलाओं का जुनून ही पुरुष प्रधान दुनिया में असली ताकत है। हमें एकाग्रता, स्टेबिलिटी, मेहनत और खुद पर विश्वास की जरूरत है।'' 
 
आयशा अपनी इस सफलता से बेहद खुश हैं, लेकिन देश की सबसे कम उम्र की महिला पायलट होने के बजाए उन्हें इस बात की सबसे ज्यादा खुशी है, कि वे अपने बचपन के सपने को पूरा कर पाईं और आज भारतीय लड़कियों के लिए आदर्श स्थापित कर पाईं। आयशा इस क्षेत्र में सफलता का पूरा श्रेय अपने परिवार को देती हैं। 
 
तो अब आंगन में चहकती चिड़िया भी आकाश को छूती है 
कोई ये न समझे कि वो ठिकाना बस परिंदों का है 

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