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Written By WD

मत छेड़ कि यार से जुदा हूँ

मत छेड़ यार जुदा
NDND
- मौ. मुस्तफ़ा खाँ 'शेफ्ता'

मत छेड़ कि यार से जुदा हूँ,
ऐ मर्ग मैं आप मर रहा हूँ।

लैला कहने से बिगड़ गए थे,
दीवाना मैं जान कर बना हूँ।

कहता हूँ जो ग़ैर से न मिलिए,
कहता है कि क्या मैं बेवफ़ा हूँ।

बेगाना-वशी, सितम है उनकी,
ग़ैरों को भी यार जानता हूँ।

हमदम! न सही मुहब्बत उसको,
इस बात पे क्या उसे न चाहूँ।

मैं 'शेफ़्ता' हूँ अज़ीजे-दिलहा,
शीरीं गुफ़्तार, खुश-नवा हूँ।
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WD