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पुस्तकों की आवाज
बनवारी रूहैलापुस्तकें चाहती है, करना बातें,आज की, कल की, बीते जमानों की, एक एक पल कीपुस्तकें कुछ कहना चाहती हैं,हमारे पास रहना चाहती हैं।पुस्तकें जीवन महकाती हैं। पुस्तकों में खेती लहलहाती है।पुस्तकों में तकनीकी का राज है,पुस्तकों में विज्ञान की आवाज है।पुस्तकों में ज्ञान का भंडार है,पुस्तकों में संस्कृति महान है। पुस्तकों में राम का चरित्र महान है,पुस्तकों में कृष्ण की लीलाओं का बखान है। पुस्तकें हमें कुछ देना चाहती हैं,पुस्तकें हमारे पास रहना चाहती हैं।