व्यसन से बिगाड़ती है जिंदगी
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भारतीय आबादी में मुख्य रूप से -
* शराब * धूम्रपान (बीड़ी/ सिगरेट/ हुक्का) * तंबाकू/ जर्दा/ पान/ सुपारी खाने की लत * गाँजा/ भाँग/ चरस/ अफीम एवं इससे बने अन्य विकसित उत्पाद जैसे स्मैक, हेरोइन आदि की लत पाई जाती है।
सभी व्यसन व्यक्तिशः तथा प्रत्यक्षरूपेण हानिकारक हैं, किंतु धूम्रपान करने वाले के साथ रहने वालों पर भी इसका विपरीत असर पड़ता है। हाल में प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार सिगरेट पीने वालों के परिवारजनों को फेफड़ों का कैंसर होने की आशंका सात गुना अधिक है। इसलिए समझा जा सकता है कि सिगरेट पीने वाले परिवार के मुखिया द्वारा परिवार के सदस्यों तथा बच्चों का जीवन किस प्रकार खतरे में डाला जा रहा है।
धूम्रपान के प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष फायदे एक भी नहीं हैं जबकि उसके द्वारा होने वाले शारीरिक नुकसान की फेहरिस्त काफी लंबी है। ब्रांकाइटिस, एसीडिटी, फेफड़ों का कैंसर, आमाशय का कैंसर, मूत्राशय का कैंसर, बर्जर रोग (पैरों की मध्यम एवं छोटी धमनियों में अवरुद्धता) जैसे गंभीर रोग शरीर में घर कर जाते हैं। तंबाकू, जर्दा तथा सुपारी चबाने से मुख के कैंसर के होने का रास्ता आसान हो जाता है। जबड़े अथवा गले का कैंसर रोगी को आर्थिक और मानसिक रूप से तोड़ देता है। इसके अलावा पारिवारिक तथा सामाजिक जीवन भी अस्त-व्यस्त हो जाता है।
नियमित शराबखोरी चरणबद्ध तरीके से मानव शरीर को प्रभावित करती है। इससे सबसे पहले शरीर में खून की कमी होने लगती है। सामान्य कमजोरी के अलावा शरीर में विटामिन 'बी' समूह की कमी हो जाती है और बेरी-बेरी रोग एवं लीवर सिरोसिस जैसे लाइलाज रोग जकड़ लेते हैं। शराबखोर को इस हालत में पहुँचने में 2 से 20 वर्ष तक का समय लग सकता है किंतु भारत जैसे ऊष्ण कटिबंधीय देश में मद्य सेवन के शारीरिक दुष्प्रभाव जल्दी ही सामने आते हैं। यह आम धारणा है कि मद्य सेवन से यौन संबंध स्थापित करने की क्षमता बढ़ जाती है, जबकि ऐसा नहीं है। शराब सेवन यौनेच्छा को बढ़ाती है, यौन क्षमता को नहीं, यह स्थापित वैज्ञानिक तथ्य है।
