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कमर दर्द भगाएँ यौगिक क्रियाओं से
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-ए.के. राव

आजकल यह देखने में आ रहा है कि 30 से 35 वर्ष उम्र के स्त्री-पुरुष कमर दर्द की बीमारी से पीड़ित रहते हैं।

कमर में 24 हड्डियाँ हैं जो एक-दूसरे पर इस प्रकार रखी हुई हैं जैसे दीवार बनाते समय ईंटों को एक-दूसरे पर रखते हैं। इन हड्डियों के बीच में कार्टिलेज व इलास्टिक तंतू की डिस्क रहती है जो कि हमें झटके के समय चोट से बचाती है। डिस्क हड्डियों के बीच में नहीं रहती है या घिस जाती है तो कमर का लचीलापन समाप्त हो जाता है और दर्द शुरू हो जाता है। यदि नितंब में ऐसी शुरुआत हो तो साइटिका की बीमारी हो सकती है जिससे नितंब से जाँघ व पाँव में दर्द होता है। इसका समय पर डॉक्टर और योग विशेषज्ञ की सलाह से इलाज शुरू कर लेना चाहिए।

कमर दर्द होने के कारण :

कमर दर्द का मुख्य कारण मांसपेशियों पर अत्यधिक तनाव होता है।

जोड़ों में खिंचाव से भी यह होता है।

कैल्शियम की कमी से हड्डियाँ कमजोर हो जाती हैं।

अधिक वजन होने से भी कमर दर्द होता है। प्रसव के बाद स्त्रियों को योगाभ्यास शुरू कर देना चाहिए।

गलत तरीके से बैठने से कमर दर्द होता है। हमें सीधा बैठना व सीधा चलना चाहिए।

लेटकर टी.वी. देखना, लेटकर पढ़ना भी दर्द का मुख्य कारण है।

ऊँची एड़ी के जूते पहनने से कमर दर्द हो सकता है।

बिस्तर रूई या टाट का होना चाहिए। कुर्सी अधिक नरम नहीं होना चाहिए।

तनाव के कारण भी दर्द होता है।

व्यायाम या योगाभ्यास नहीं करने वालों को भी कमर दर्द होता है।

रसोईघर का प्लेटफार्म उपयुक्त ऊँचाई पर होना चाहिए अन्यथा दर्द हो सकता है।

गलत तरीके से खड़ा रहना, कार चलाना, काम करना, व्यायाम करना, योगाभ्यास करना, सोना, भारी सामान उठाना आदि भी दर्द का कारण हो सकता है।

कमर दर्द को रोकने के लिए निम्नलिखित क्रियाएँ लाभदायक हैं-

सीधा चलना, सीधा बैठना, लेटकर नहीं पढ़ना, टी.वी. आदि लेट कर नहीं देखना।

भारी चीजों को या किसी सामान को नीचे से उठाते समय अपनी उम्र के अनुसार, पहले घुटने को झुकाकर फिर उठाना चाहिए।

कार चलाते वक्त सीट सख्त होना चाहिए व स्टेयरिंग के पास बैठना चाहिए।

खड़े रहते समय पैरों के आगे के भाग पर वजन रखकर खड़े होना चाहिए।

पेट के बल नहीं सोना चाहिए। करवट से सोते वक्त घुटने को थोड़ा मोड़कर सोना चाहिए।

अधिक काम करने के बाद थोड़ा आराम करना चाहिए।

कमर दर्द शुरू होने पर डॉक्टर व योग विशेषज्ञ की सलाह से निम्न योग क्रियाओं में से कुछ करना चाहिए-

(1) ताड़ासन, (2) शरीर संचालन, (3) पवनमुक्तासन (गर्दन नहीं उठाना), (4) भुजंगासन, (5) सर्पासन, (6) धनुर्आसन, (7) शलभासन, (8) मकरासन, (9) वज्रासन, (10) पद्मासन, (11) सेतुबंद आसान, (12) मार्जरी आसनी, (13) क्रकोडाइल वन एंड टू, (14) योगेन्द्र प्राणायाम, (15) भ्रामरी प्राणायाम, (16) भस्रीक प्राणायाम, (17) ध्यान, (18) शवासन तथा (19) योगनिंद्रा।

योग से तनाव दूर होता है व शारीरिक तथा मानसिक बीमारियाँ दूर होती हैं। प्रातः या शाम अपनी शक्ति के अनुसार दो-तीन किलोमीटर घूमना चाहिए। सोने के दो घंटे पूर्व भोजन करना चाहिए। दिन में एक वक्त दिल खोलकर ठहाका मारकर हँसना चाहिए। दर्द के समय गैस उत्पन्न करने वाला भोजन नहीं करना चाहिए। सुपाच्य व हल्का भोजन करना चाहिए।
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