व्यक्ति के कोमा में रहने पर साधारणतः लोग समझते हैं कि मनुष्य में सोचने, समझने और सुनने की क्षमता नहीं होती है। लेकिन वैज्ञानिकों द्वारा किए गए शोध में इस बात का पता चला है कि ऐसा नहीं है। मनुष्य के कोमा में रहने के बावजूद वह बातों को समझ और सुन सकता है। अध्ययन के अनुसार कोमा में पहुँचने के बावजूद उसमें संवेदना रहती है और वह सुनने और समझने की स्थिति में रहता है।
बढ़ती उम्र में याददाश्त की कमजोरी की समस्या से परेशान लोगों को अब घबराने की जरूरत नहीं है। एक नए शोध से पता चला है कि भोजन में मैग्नीशियम की पर्याप्त मात्रा लेकर याददाश्त के साथ ही सीखने की क्षमता को भी बढ़ाया जा सकता है। विज्ञान पत्रिका न्यूरान में इस शोध का ब्योरा दिया गया है। चीन में पेइचिंग के सिंगहुआ विश्वविद्यालय में चूहों पर याददाश्त संबंधी परीक्षण किया गया।