एनी बेसेंट नहीं 'माँ बसंत' कहो

24 दिसंबर एनी की पुण्यतिथि पर विशेष

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आध्यात्मिक और राजनीतिक रूप से सोए हुए को जगाने के लिए भारत को अपना घर कहने वाली का जीवन जानने योग्य है। कारण स्पष्ट है कि उन्होंने दुनियाभर के धर्मों का गहन अध्ययन किया। उन धर्मों को जाना-परखा और समझा कि वेद और उपनिषद का धर्म ही सच्चा मार्ग है, लेकिन अफसोस कि भारत अभी भी अपने इस ज्ञान के प्रति ज्ञानशून्य है।

एनी बेसेंट को देह छोड़े कई वर्ष गुजर गए लेकिन आज भी भारत ज्ञानशून्य है। उक्त काल में जरूर के चलते कई अन्य तरह के आंदोलनों का जन्म हुआ। जैसे कि आर्य समाज, रामकृष्ण मिशन आदि। थियोसॉफी की खास बात यह थी कि इनसे विश्वविख्यात दार्शनिक जे. कृष्णमूर्ति जुड़े हुए थे।

व्यक्तित्व : एक विदेशी महिला जब भारत में रहने लगी तो उन्होंने स्वयं को कभी विदेशी नहीं समझा। हिन्दू धर्म पर व्याख्‍यान से पूर्व वह 'ॐ नम: शिवाय' का उच्चारण करती थी। विलक्षण स्मरण शक्ति, नोट्स नहीं बनाती थी। वेशभूषा के प्रति अत्यन्त सावधान रहती थी। समय की अत्यंत पाबंद थी। 'मेम साहब' कहलाना पसंद नहीं करती थी। 'अम्मा' नाम उन्हें पसंद था। भारत से प्रेम किया और भारतवासियों ने उन्हें 'माँ बसंत' कहकर सम्मानित किया।

जन्म : 1 अक्टूबर 1847 को एनी का जन्म में हुआ। उनका जन्म नाम एनी वुड था। माता आस्था वाली आयरिश महिला, पिता विद्वान गणितज्ञ अँग्रेज, एक भाई दो वर्ष बड़ा था। 1852 को उनके पिता के निधन के बाद माता द्वारा बेहद गरीबी में दोनों बच्चों का पालन-पोषण किया गया। अध्यापिका कुमारी मेरयित नामक दयालु महिला द्वारा एनी को अपने संरक्षण में लेकर शिक्षा-दीक्षा का प्रबन्ध किया गया।

अनिरुद्ध जोशी 'शतायु'|
विवाह और तलाक : 1866 को एनी को धार्मिक, आध्यात्मिक, रहस्यवाद की पुस्तकें पढ़ने का शौक हुआ। उसी दौरान ईसा के प्रति लगाव हुआ। 1867 को युवा अँग्रेज पादरी फ्रैंक बेसेंट से उनका विवाह हो गया। पति कट्टर रोमन कैथोलिक थे लेकिन एनी रूढ़िगत विचार नहीं स्वीकारना चाहती थी। इसी कारण वैचारिक मतभेद के चलते विवाह-सम्बन्ध कटुता के चलते विच्छेद हो गए। 1868-70 के मध्य एक पुत्र और एक पुत्री को जन्म दिया।


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