शुक्र देते हैं आकर्षण, ऐश्वर्य, सौभाग्य, धन, प्रेम और वैभव, जानिए शुभता के उपाय

Last Updated: गुरुवार, 14 जून 2018 (15:50 IST)

आकर्षण, ऐश्वर्य, सौभाग्य, धन, प्रेम और वैभव के कारक हैं। शुक्र जिसके केंद्र में त्रिकोणगत हों वह अत्यंत आकर्षक होता है।

बृहद पराशर होरा शास्त्र में कहा गया है कि

सुखीकान्त व पुः श्रेष्ठः सुलोचना भृगु सुतः।
काब्यकर्ता कफाधिक्या निलात्मा वक्रमूर्धजः।।












तात्पर्य यह है कि शुक्र बलवान होने पर सुंदर शरीर, मुख, नेत्र, पढ़ने-लिखने का शौकीन, कफ वायु प्रकृति प्रधान होता है।

शुक्र के अन्य नामः भृगु,
भार्गव, सित, सूरि,
कवि, दैत्यगुरु, काण, उसना, सूरि, जोहरा (उर्दू का नाम) वीनस (अंग्रेजी)आदि हैं।

शुक्र का वैभवशाली स्वरूपः यह ग्रह सुंदरता देता है। मध्यम शरीर, सुंदर विशाल नेत्रों वाला, जल तत्व प्रधान, दक्षिण पूर्व दिशा का स्वामी, श्वेत वर्ण, युवा किशोर अवस्था का प्रतीक है। चर प्रकृति, रजोगुणी, विलासी भोगी, मधुरता वाले स्वभाव के साथ चालबाज, तेजस्वी स्वरूप, श्याम वर्ण केश और स्त्रीकारक ग्रह है। इसके देवता भगवान इंद्र हैं। इसका वाहन अश्व है। इंद्र की सभा में अप्सराओं के अधिकाधिक प्रसंग शुक्र की वजह से ही मिलते हैं।




शुक्र मुख्यतः स्त्रीग्रह, कामेच्छा, वीर्य, प्रेम वासना, रूप सौंदर्य, आकर्षण, धन संपत्ति, व्यवसाय आदि सांसारिक सुखों के कारक है। गीत संगीत, ग्रहस्थ जीवन का सुख, आभूषण, नृत्य, श्वेत और रेशमी वस्त्र, सुगंधित और सौंदर्य सामग्री, चांदी, हीरा, शेयर, रति एवं संभोग सुख, इंद्रिय सुख, सिनेमा, मनोरंजन आदि से संबंधी विलासी कार्य, शैया सुख, काम कला, कामसुख, कामशक्ति, विवाह एवं प्रेमिका सुख, होटल मदिरा सेवन और भोग विलास के कारक ग्रह शुक्र माने जाते हैं।

शुक्र की अशुभताः अगर शुक्र अशुभ हैं तो आर्थिक कष्ट, स्त्री सुख में कमी, प्रमेह, कुष्ठ, मधुमेह, मूत्राशय संबंधी रोग, गर्भाशय संबंधी रोग और गुप्त रोगों की संभावना बढ़ जाती है और सांसारिक सुखों में कमी आती है। शुक्र के साथ यदि कोई पाप स्वभाव का ग्रह हो तो व्यक्ति काम वासना के बारे में सोचता है। पाप प्रभाव वाले कई ग्रहों की युति होने पर यह कामवासना भड़काने के साथ-साथ बलात्कार जैसी परिस्थितियां उत्पन्न कर देता है। शुक्र के साथ मंगल और राहु का संबंध होने की दशा में यह घरेलू हिंसा का वातावरण भी बनाता है।

अशुभ शुक्र के लिए क्या करें- अशुभ शुक्र की शांति के लिए शुक्र से संबंधित वस्तुओं का दान करना चाहिए। जैसे चांदी, चावल, दूध, श्वेत वस्त्र आदि।

1- दुर्गाशप्तशती का पाठ करना चाहिए।

2- कन्या पूजन एवं का व्रत करना चाहिए।

3- हीरा धारण करना चाहिए।

(यदि हीरा संभव न हो तो अर्किन, सफेद मार्का, ओपल, स्फटिक आदि शुभवार, शुभ नक्षत्र और शुभ लग्न में धारण करना चाहिए।)

4- शुक्र का बीज मंत्र भी लाभकारी होगा।

ॐ शुं शुक्राय नमः

ॐ हृीं श्रीं शुक्राय नमः

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