कहां-कहां मोर्चा खोल रखा है इस्लामिक आतंकवादियों ने?

Last Updated: बुधवार, 7 दिसंबर 2016 (12:18 IST)
नाइजीरिया : अफ्रीका में आतंकवाद तेजी से फैलता जा रहा है। नाइजीरिया अफ्रीका का एक देश है। इतिहासकारों के अनुसार नाइजीरिया में सभ्‍यता की शुरुआत ईसा पूर्व 9000 में हुई थी। ब्रिटेन ने सन 1900 से 1960 तक नाइजीरिया पर शासन किया और 1 अक्‍टूबर 1960 को यह देश आजाद हुआ। नाइजीरिया में जब तक मुस्लिम अल्पसंख्‍यक थे तब तक वहां आतंकवाद की कोई खास समस्या नहीं थी लेकिन जहां-जहां मुस्लिमों की आबादी बढ़ी, वहां-वहां फसाद और दंगे शुरू हो गए। फिलहाल नाइजीरिया में ईसाइयों की जनसंख्‍या 49.3 प्रतिशत और मुस्लिमों की जनसंख्या 48.8 प्रतिशत है। अन्य धर्म के लोगों की संख्‍या 1.9 प्रतिशत है।
इसी पृष्ठभूमि में कट्टरपंथी मुस्लिम धर्मगुरु मोहम्मद यूसुफ ने 2002 में बोको हराम का गठन किया। उसने एक धार्मिक कॉम्प्लेक्स बनाया जिसमें एक मस्जिद और इस्लामी स्कूल भी बनाया गया। नाइजीरिया के कई गरीब मुस्लिम परिवारों के साथ-साथ पड़ोसी देशों के बच्चों को भी इस स्कूलों में दाखिला देकर उन्हें के लिए प्रेरित किया गया। साल 2009 में बोको हराम ने माइडूगूरी स्थित पुलिस स्टेशनों और सरकारी इमारतों पर कई हमले किए। 
 
इसका नतीजा ये हुआ कि माइडूगूरी की सड़कों पर गोलीबारी हुई। बोको हराम के सैकड़ों की संख्या में समर्थक मारे गए और हजारों की संख्या में शहर छोड़कर भाग गए। नाइजीरिया के सुरक्षाबलों ने संगठन के मुख्यालय पर कब्जा कर लिया, उसके लड़ाकुओं को पकड़ा और यूसुफ को मार दिया। मोहम्मद यूसुफ के शव को सरकारी टेलीविजन पर दिखाया गया और सुरक्षाबलों ने घोषणा की कि बोको हराम का खात्मा कर दिया गया। फिर अबू बकर शेकाऊ नेता बना। बस, तभी से यहां लड़ाई जारी है। 
 
बोको हराम नाइजीरिया का एक आतंकी संगठन है, जो अपनी बर्बरता के लिए जाना जाता है। यह संगठन उस वक्त दुनिया की नजर में आया, जब इसने नाइजीरिया के एक स्कूल से 250 छात्राओं को अगवा कर लिया था। इस संगठन का आधिकारिक नाम जमाते एहली सुन्ना लिदावति वल जिहाद है जिसका अरबी में मतलब हुआ, जो लोग पैगंबर मोहम्मद की शिक्षा और जिहाद को फैलाने के लिए प्रतिबद्ध होते हैं।
 
इस संगठन ने साल 2010 में नववर्ष की पूर्व संध्या पर सैन्य बैरक पर हमला किया। फिर साल 2011 में क्रिसमस के दिन राजधानी आबुजा में चर्च पर हमला किया था जिसमें सैकड़ों लोग मारे गए थे। नाइजीरिया में मुस्लिम राष्ट्रपति होने के बावजूद बोको हराम उसे एक ऐसा देश मानते हैं जिसे अल्लाह में विश्वास न करने वाले लोग चला रहे हैं।
 
आर्म्ड कनफ्लिक्ट लोकेशन एंड इवेंट डेटा प्रोजेक्ट के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2014 में बोको हराम के हमलों में 6,347 लोग मारे गए थे। ये आंकड़ा साल 2015 में 30 फीसदी बढ़ने की आशंका है। साल की शुरुआत में ही बोको हराम ने 1 ही दिन में 2,000 लोगों की हत्या कर दी थी। ये बोको हराम का अब तक का सबसे बड़ा हमला माना जाता है। इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशन फॉर माइग्रेशन के अनुसार बोको हराम के आतंक से अब तक 20 लाख से भी ज्यादा लोग अपने घरों को छोड़कर भाग चुके हैं। इस लड़ाई का सबसे बड़ा नुकसान ईसाई परिवारों को उठाना पड़ा है, जो कि बेहद ही गरीब हैं। वे अपना मुल्क छोड़ना चाहते हैं लेकिन कैसे? पूर्वोत्तर नाइजीरिया और चाड झील के इलाके में चल रही लड़ाई में करीब 20 लाख लोग बेघर हो गए हैं। 
 
इसके अलावा नाइजीरिया में एक और संगठन सक्रिय है जिसे फुलानी कहा जाता है। फुलानी उग्रवादी उत्तरी और मध्य नाइजीरिया में सक्रिय हैं और अकसर ईसाई किसानों पर हमले करते हैं। पिछले वर्ष उन्होंने 1,229 हत्याएं कीं। खानाबदोश की तरह जगह बदलता यह संगठन नाइजीरिया में सक्रिय है। यह फुला कबीले का हथियारबंद संगठन है। ये फुलानी लोगों के जमींदारों को निशाना बनाता है। 2015 में इस उग्रवादी संगठन ने 150 से ज्यादा हमले किये और 1,129 लोगों की जान ली।

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