उज्जैन में होती है कई सुंदर धार्मिक यात्राएं

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धर्म और आध्यात्म की सुंदर नगरी उज्जैन में साल भर पवित्र गतिविधियां आयोजित होती रहती हैं। कइ तरह की यात्राएं इनमें शामिल हैं जिन्हें स्थानीय निवासी जत्रा कहते हैं। आइए डालें एक नजर... 

पंचक्रोशी यात्रा 
यह यहां की प्रसिद्ध यात्रा है। इस यात्रा में आने वाले देव- 1. पिंगलेश्वर, 2 कायावरोहणेश्वर, 3. विल्वेश्वर, 4. दुर्धरेश्वर, 5. नीलकंठेश्वर हैं। 

अष्ठाविंशाति तीर्थयात्रा
 
इसमें 28 तीर्थ हैं, सब तीर्थ प्राय: नदी के तट पर हैं-
 
1. रुद्र सरोवर, 2. कर्कराज, 3. नरसिंह तीर्थ, 4. नीलगंगा संगम, 5. पिशाचमोचन, 6. गंधर्वती तीर्थ, 7. केदार तीर्थ, 8. चक्रतीर्थ, 9. सोमतीर्थ, 10. देवप्रयाग तीर्थ, 11. योगी तीर्थ, 12. कपिलाश्रम तीर्थ, 13. धृतकुल्या तीर्थ, 14. मधुकुल्या तीर्थ, 15 औखर तीर्थ, 16. कालभैरव तीर्थ, 17. द्वादशार्क तीर्थ, 18. दशाश्वमेध तीर्थ, 19. अंगारक तीर्थ, 20. खर्गता संगम तीर्थ, 21. ऋणमोचन तीर्थ, 22. शक्तिभेद तीर्थ, 23 पापमोचन तीर्थ, 24. व्यास तीर्थ, 25. प्रेत मोचन तीर्थ, 26. नवनदा तीर्थ, 27. मंदाग्नि तीर्थ, 28. पैतामह तीर्थ।

महाकाल यात्रा
 
इस यात्रा का आरंभ रुद्रसागर से होता है। रुद्रसागर में स्नान पर यात्रा के देवों के दर्शन करते हैं।
 
यात्रा के देव
 
1. कोटेश्वर, 2. महाकाल, 3. कपाल मोचन तीर्थ, 4. कपिलेश्वर, 5. हनुमत्केश्वर, 6. पैपलाध, 7. स्वप्नेश्वर, 8. विश्वतोमुश, 9. सोमेश्वर, 10. वैश्वानरेश्वर, 11. लकुलीश, 12. गधानेश्वर, 13. विघ्ननायक, 14. वृद्धकालेश्वर, 15. विघ्ननाशक, 16. प्राणीशवल, 17. तनयेश्वर, 18. दंडपाणि, 19. गृहेश्वर, 20. महाकाल, 21. दुर्वासेश्वर, 22. कालेश्वर, 23. वाधिरेश्वर, 24. यात्रेश्वर।

क्षेत्र यात्रा
 
1. शंखोधार क्षेत्र- अंकपात में
2. विश्वरूप क्षेत्र- सिंहपुरी में
3. माधव क्षेत्र- अंकपात में

नगर प्रदक्षिणा
 
इस यात्रा के 5 मुख्य स्थल हैं-
 
1. पद्मावती, 2. स्वर्ण श्रृंगा, 3 अवन्तिका, 4. अमरावती, 5. उज्जयिनी। 

नित्य यात्रा
 
1. शिप्रा स्नान, 2. नाग चन्द्रेश दर्शन, 3. कोटेश्वर दर्शन, 4. श्री महाकालेश्वर दर्शन, 5. अवन्ति देवी के दर्शन, 6. हरसिद्धि देवी तथा 7. अगस्तेश्वर के दर्शन। 
द्वादश यात्रा
 
1. गुप्तेश्वर, 2. अगस्तेश्वर, 3. ढुण्ढेश्वर, 4. डमरूकेश्वर, 5. अनादि कल्पेश्वर, 6. सिद्धेश्वर, 7. वीरभद्रा देवी, 8. स्वर्ण जानश्वर, 9. त्रिविष्टपेश्वर, 10. कर्कोटेश्वर, 11. कपालेश्वर, 12. स्वर्गद्वारेश्वर। 

सप्तसागर यात्रा
 
1. रुद्रसागर, हरसिद्धि के पास, 2. पुष्कर सागर, नलिया बाखल में, 3. क्षीरसागर, डाबरीपीठा में, 4. गोवर्धन सागर, बुधवारिया में, 5. रत्नाकर सागर, भोपाल लाइन में उंडासा गांव में, 6. विष्णुसागर, अंकपात में, 7. पुरुषोत्तम सागर, अंकपात दरवाजे में।
 
(स्थानीय प्रशासन की कृपा से अब यह सभी नष्ट-भ्रष्ट हैं।) 

अष्ट महाभैरव
 
1. दंडपाणि भैरव, देवप्रयाग के पास, 2. विक्रांत भैरव, औखरेश्वर के पास, 3. महाभैरव, सिंहपुरी में, 4. क्षे‍त्रपाल, सिंहपुरी में, 5. बटुक भैरव, ब्रह्मपोल में, 6. आनंद भैरव, मल्लिकार्जुन पर, 7. गौर भैरवगढ़ पर, 8. कालभैरव, भैरवगढ़ पर।

नौ नारायण यात्रा > >
इन यात्राओं में नौ नारायण यात्रा प्रमुख है। नौ नारायणों के दर्शन करने से नौ ग्रहों की शांति हो जाती है। इनकी पंचोपचार पूजा करना चाहिए। पूजा या यात्रा के साथ दान का भी महत्व शास्त्रों में बताया गया है। नौ नारायण भगवान विष्णु के दशावतारों के विभिन्न स्वरूप हैं। ये नौ स्वरूप उज्जैन में ही विराजित है।
 
- पुरुषोत्तमनारायण : पुरुषोत्तमनारायण मंदिर हरसिद्घि मंदिर के समीप स्थित है। करीब 200 वर्ष इस पुराने मंदिर में पुरुषोत्तममास के दौरान श्रद्घालुओं का ताँता लगा रहेगा। यहाँ के दर्शन व पूजा करने से हर प्रकार की मनोकामनाओं की प्राप्ति होती है।
 
- अनंतनारायण : अनंतपेठ स्थित अनंतनारायण मंदिर 300 वर्ष से अधिक पुराना है। यहाँ अधिक मास के अलावा हरियाली अमावस्या तथा अनंत चतुर्दशी पर पूजा-पाठ का विशेष महत्व है। इनकी पूजा करने से अनंत सुख मिलता है।
 
- सत्यनारायण : सत्यनारायण मंदिर ढाबा रोड पर है। लगभग 200 साल पुराने इस मंदिर में प्रतिदिन ही श्रद्घालु दर्शनों के लिए पहुँचते हैं। सत्यनारायण के दर्शन करने या यहाँ कथा श्रवण करने से सुख समृद्घि की कामना पूर्ण होती है।
 
- चतुर्भुजनारायण : चतुर्भुजनारायण मंदिर भी ढाबा रोड पर ही है। इस प्राचीन मंदिर में भी नौ नारायण करने वाले यात्रियों की संख्या कम नहीं होगी। इनके दर्शन करने से चारों तरफ ख्याति मिलती है।
 
- आदिनारायण : सेंट्रल कोतवाली के समक्ष स्थित आदिनारायण मंदिर में दर्शन या पूजा करने से समस्त दुःखों का नाश होता है। मंदिर काफी पुराना है।
 
- शेषनारायण : क्षीरसागर परिक्षेत्र में है शेषनारायण मंदिर। लगभग पाँच सौ वर्ष पुराने इस मंदिर में भगवान विष्णु शेषनाग पर विश्राम कर रहे हैं। सामने बैठी माता लक्ष्मी उनके चरण दबा रही है। यहाँ अद्भुत स्वरूप के दर्शन होते हैं।
 
- पद्मनारायण : पद्मनारायण मंदिर भी क्षीरसागर पर ही है। इस प्राचीन मंदिर में भगवान विष्णु का स्वरूप निराला है। यहाँ की यात्रा करने से अक्षय फल की प्राप्ति होती है।
 
- लक्ष्मीनारायण : गुदरी चौराहा पर है लक्ष्मीनारायण मंदिर। कहा जाता है कि यहाँ नियमित दर्शन या आराधना करने वाले व्यक्ति को किसी बात की कमी नहीं रहती है। मूर्ति चमत्कारी है।
 
- बद्रीनारायण : बक्षी बाजार में बद्रीनारायण मंदिर है। यह मंदिर भी काफी पुराना है। नौ नारायण की यात्रा करने वाले यात्री यहाँ पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद ग्रहण करते हैं।
एकादश रुद्र
 
1. कपर्दी, तिलभांडेश के पास, 2. कपाली, ब्रह्मपोल में, 3. कलानाथ, ओखरेश्वर पर, 4. वृषासन, महाकाल में, 5. व्यंबक, ओखरेश्वर में, 6. चीरवासा, महाकाल में, 7. दिगम्बर जाठ के कुएं पर, 8. गिरीश, कालिका के मंदिर में, 9. कामचारी, वृंदावनपुरा में, 10. शर्व, सर्वांग भूषण तीर्थ पर। 

देवी के स्थान
 
1. एकानंशा, सिंगपुरी में, 2. भद्रकाली, चौबीस खंभे पर, 3. अवन्तिका, महाकालेश्वर में।
 
नवदुर्गा (अब्दालपुरा में), चौंसठ योगिनी (नयापुरा में)। विंध्यवासिनी (गढ़ पर खेत में) अथवा सिंगपुरी में कालिका के नाम से प्रसिद्ध है। वैष्णवी (सिंगपुरी में) पंडित कालूरामजी त्रिवेदी के मकान में। कपाली, जोगीपुरा में। छिन्नमस्तिका अब्दालपुरा में। वाराही कार्तिक चौक में वाराही माता की गली में। महाकाली, महालक्ष्मी, महासरस्वती कार्तिक चौक में एक ही मंदिर में।

 
 
यद्यपि महाकाल वन में शिवलिंग की संख्या असंख्‍य है तथापि सनत कुमार का वाक्य है-
 
षष्टि कोटि सहस्राणि, षष्टि कोटि शतनीच।
महाकाल वने देवि लिंग संख्या न विध्यते। 
 
किंतु उन असंख्य शिवलिंग में 84 मुख्य शिव के स्थान हैं। 84 महादेव की यात्रा पिछले कुछ समय से विशेष रूप से लोकप्रिय हो रही है। इसकी वजह है मंदिरों का नवीनीकरण।  इन 84 महादेव के दर्शन यहां करें...
क्लिक कीजिए : 84 महादेव 

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