सिंहस्थ और दान : अन्न दान का महत्व

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सिंहस्थ में का बहुत महत्व है। इस अवसर पर थोड़ा दान करने से भी ज्यादा फल मिलता है। उज्जैन और की विशेष महिमा है। से ही शरीर चलता है। अन्न ही जीवन का आधार है। अन्न प्राण है, इसलिए इसका दान प्राणदान के समान है। यह सभी दानों में श्रेष्ठ और ज्यादा फल देने वाला माना गया है। यह धर्म का सबसे महत्वपूर्ण अंग है।   
पुण्य मास में शुक्ल पक्ष में सूर्योदय के समय उत्तम तिथि, शुभवार, उत्तम नक्षत्र और योग में पत्नी के साथ पवित्र होकर ब्राह्मणों को भोजन के लिए बुलाना चाहिए। भोजन में सिर्फ वेदों को जानने वाले कर्मकाण्ड के ज्ञाता ब्राह्मणों को निमंत्रित करना चाहिए। ब्राह्मणों की संख्या कितनी हो, यह श्रद्धालु की सामर्थ्य पर निर्भर करता है। वैसे में एक हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने का विधान बताया गया है। भोजन से पहले ब्राह्मणों को स्वस्तिवाचन करना चाहिए। इन ब्राह्मणों में एक आचार्य का वरण करना चाहिए। दस या आठ ब्राह्मणों को ऋत्विज बनाना चाहिए। सोने का कलसा रख कर उस पर विष्णु की स्वर्ण प्रतिमा स्थापित करनी चाहिए। उस प्रतिमा का सोलह उपचारों से पूजन करना चाहिए।

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