सिंहस्थ और दान : गोदान का महत्व


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सब तरह के कल्याण और सभी के उपकार के लिए गोदान उपयोगी है। उज्जैन में यह दान करना चाहिए।  को यह दान सबसे ज्यादा अच्छा लगता है।   
 
कहा गया है कि जो श्रेष्ठ विमान पर चढ़कर दिव्य अलंकारों से विभूषित होकर स्वर्ग जाना चाहे उसे गोदान करना चाहिए। यह दान दैहिक, दैविक और भौतिक पापों को नष्ट करता है। यह दान देने वाले को बैकुण्ठ ले जाता है। यह उसके पितरों को मोक्ष देता है।
 
गोदान विधिः - पुण्यकाल में पवित्र होकर पवित्र स्थान में अपनी धर्मपत्नी के साथ गोदान करना चाहिए। पहले आचमन करके प्राणायाम करना चाहिए। फिर कहना चाहिए मैं अपने सब पापों को दूर करने के लिए, सभी मनोरथ पूरा करने के लिए वेणीमाधव की प्रसन्नता के लिए गोदान का संकल्प करता हूं। संकल्प में मास, तिथि, वार, नक्षत्र, योग और अपने गोत्र का उच्चारण भी करना चाहिए।
 
इसके बाद गणेशजी का पूजन कर गोदान लेने वाले ब्राह्मण का वरण करना चाहिए।
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आगे पढ़ें कौन है गोदान लेने के अधिकारी.... 
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