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Ntthu Ram Puri | चंडीगढ़ से नॉटिंघम की उड़ान

चंडीगढ़
- निष्ठा चुघ (लंदन से)
BBC
लगभग चालीस साल पहले 26 साल का एक नौजवान पंजाब से ब्रिटेन आया था, सिर पर परिवार की जिम्मेदारी, दिल में ख्वाब और जेब में सिर्फ 450 पाउंड। आज उस व्यक्ति के नाम के साथ जुड़ी हैं 30 से अधिक कंपनियाँ और करोड़ों डॉलर का व्यापार। यह है इंग्लैंड के शहर नॉटिंघम में बसे भारतीय उद्योगपति नत्थू राम पुरी की कहानी, जिन्हें लोग प्यार से नैट पुरी भी कहते हैं।

वे बताते हैं, 'मैंने पंजाब यूनिवर्सिटी से गणित में डिग्री ली थी, मन में आया कि आगे पढ़ाई करके खुद को और काबिल बनाया जाए ताकि बढ़िया नौकरी मिल सके। मैंने ब्रिटेन के नेशनल कॉलेज में दाखिला ले लिया। मुझे अपना मनपंसद कोर्स नहीं मिला तो मैंने एयरकंडिशनिंग एंड रेफ्रिजरेशन के डिप्लोमा में ही नाम लिखवा लिया।'

पुरी आज भी उस दिन को याद करते हैं, 'मैं जब यहाँ आया था तब सोचा नहीं था कि एक दिन इतनी कामयाबी मिलेगी। मुझे तो पहले के कुछ महीनों तक अध्यापकों की अँग्रेजी ही समझ नहीं आती थी। तंगी के दिन थे और मैं सालाना फीस की जगह मासिक फीस भरने लगा ताकि अगर किसी महीने कोर्स छोड़कर चला भी जाऊँ तो पूरे साल के पैसे बर्बाद न हों।'

ब्रिटेन का नेशनल कॉलेज अब यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ बैंक का हिस्सा बन चुका है, दिलचस्प बात ये है कि यूनिवर्सिटी ने कई दशकों के बाद उनकी सफलता और समाज में योगदान को देखते हुए उन्हें डॉक्टरेट की मानद उपाधि दी है।

एयरकंडिशनिंग एंड रेफ्रिजरेशन में डिप्लोमा करने के बाद उन्हें नॉटिंघम में एक कंपनी में नौकरी मिल गयी। अगले कुछ सालों में उनकी कड़ी मेहनत ने रंग दिखाना शुरू किया और वे तरक्की करते चले गए।

इसी बीच उन्होंने कुछ साल अपना बिजनेस शुरू किया, लेकिन उनके जीवन में सबसे बड़ा मोड़ आया 1983 में जब उन्होंने नॉटिंघम स्थित उसी कंपनी को खरीद लिया जहाँ उन्होंने सबसे पहले नौकरी की थी।

वे याद करते हैं, 'उस दिन ने हमेशा के लिए मेरी जिंदगी बदल दी। उसके बाद मुझे मुनाफा होने लगा। मैंने कई और कंपनियाँ खरीदीं और मेरा कारोबार बढ़ता गया। एक वक्त में मेरे अधीन 10,000 कर्मचारियों ने भी काम किया है। उसके बाद मैंने कई कंपनियाँ बेची हैं, लेकिन अब भी करीब ढाई हजार लोग हमारे साथ काम करते हैं।'

बहुत धीरे-धीरे और रुक-रुक बोलने वाले पुरी में अंदर गहरा आत्मविश्वास छिपा है, 'ये मेरा विश्वास है कि हर मुश्किल का हल होता है, अगर कोई और कर सकता है तो मैं क्यों नहीं कर सकता। लोगों के दो सिर या चार हाथ नहीं होते।'

एक व्यवसायी के तौर पर पुरी की सबसे खास बात ये रही है कि उन्होंने हर तरह के व्यापार में हाथ डाला है, चाहे उसके कारोबार का उन्हें अनुभव हो या न हो। होटल चलाने से लेकर सिगरेट कंपनियों के लिए कागज बनाने तक, यहाँ तक कि उन्होंने मशहूर कार कंपनी मर्सेडीज के लोगो बनाने का काम भी किया।

कठिन दौर : पुरी ने बचपन से ही काफी कठिनाइयों का सामना किया था, लेकिन जब अपार पैसा आने लगा तो सबसे पहले कौन-सा शौक पूरा किया, यह पूछने पर वे हँसते हुए बताते हैं, 'मेरा सपना था चंडीगढ़ में एक मकान खरीदने का। यही हसरत लेकर मैं ब्रिटेन आया था, लेकिन आज भी वहाँ मेरा कोई घर नहीं है।'

यूँ तो पूरी को इंडस्ट्रीज के संस्थापक नैट पुरी की कर्मभूमि नॉटिंघम है, लेकिन उनके तार अब भी पंजाब से जुड़े हैं।

स्वभाव से बेहद विनम्र नैट पुरी अपने बारे में पूछे जाने पर बहुत भावुक होकर बताते हैं, 'मेरी उम्र अब 70 की हो गई है, मेरा जन्म 1939 में चंडीगढ़ के पास मुल्लांपुर गरीबदास नाम के एक छोटे से कस्बे में एक भरे-पूरे परिवार में हुआ था।'

1947 में विभाजन के कारण उनके साहूकार पिता का पैसा डूब गया और उनके परिवार के सामने कठिनाइयाँ खड़ी हो गईं, आठ साल की उम्र में भारत के विभाजन की त्रासदी देखने वाले नत्थू का बचपन आम के पेड़ के नीचे लगने वाली पाठशालाओं में गुजरा।

क्रिकेट : नैट पुरी के लिए क्रिकेट मानो जीवन का हिस्सा है, कई बार तो ऐसा लगता है कि अपने कारोबार से अधिक दिलचस्पी उनकी क्रिकेट में है। वे पहले ऐसे भारतीय हैं जिन्हें ब्रिटेन के किसी भी काउंटी क्रिकेट क्लब का अध्यक्ष बनने का गौरव प्राप्त है। उन्हें इस साल मार्च में नॉटिंघम के ही क्रिकेट क्लब का प्रमुख चुना गया था, लेकिन क्रिकेट से उनका ये खास रिश्ता बहुत ही पुराना है।

पुरी बताते हैं, 'उन दिनों भारत में हॉकी का जादू चलता था, लेकिन तभी सुनील गावस्कर की टीम ने भारत से बाहर जाकर पहली बार एक टेस्ट सिरीज जीती। वेस्ट इंडीज को हराने के बाद वे ब्रिटेन में आए और यहाँ भी सिरीज जीत गए। मेरे लिए ये बहुत ही गौरव की बात थी। मेरे पास पैसे नहीं थे, उसके बावजूद मैंने भारतीय टीम का मनोबल बढ़ाने के लिए इनाम की घोषणा की। एक विकेट पर गेंदबाज को 5 पाउंड, 5 विकेट पर 100 पाउंड।'

मजेदार बात ये है कि उन्होंने कई साल पहले ये घोषणा की थी कि जो भारतीय बल्लेबाज टेस्ट क्रिकेट में 300 से ज्यादा रन बनाएगा, उसे वे 50 हजार पाउंड (40 लाख रुपए) का इनाम देंगे। कई साल बाद सहवाग ने ये कीर्तिमान बनाया।

वे कहते हैं, 'लोग भूल गए थे, लेकिन मैं अपना वादा कभी नहीं भूला था। सहवाग के इस शानदार प्रदर्शन के बाद मैंने उसे ये इनाम की रकम दी थी।'

वे सुनील गावस्कर के साथ बिताए समय को बहुत प्यार से याद करते हैं, वे कहते हैं कि गावस्कर उनके लिए बहुत खास हैं और वे कभी भी उनसे या उनके दोस्तों से मिलने के तैयार रहते हैं।