विकिरण के बुरे असर से बचाने वाली दवा
रेडियोथेरेपी के दौरान विकिरण के बुरे असर से बचाने के लिए अमेरिकी वैज्ञानिकों ने एक दवा बनाई है। इस दवा का इस्तेमाल कैंसर के मरीजों के लिए रेडियोथेरेपी की प्रक्रिया को सुरक्षित बना सकता है।
उम्मीद की जा रह है कि इस दवा का इस्तेमाल खतरनाक विकिरण पैदा करने वाले बमों या परमाणु आपदा के समय भी किया जा सकेगा। इस दवा का नाम सीबीएलबी 502 रखा गया है और जानवरों पर इसका परीक्षण किया जा चुका है।
यह दवा आदमी के अंदर एक ऐसा जैव-वैज्ञानिक तंत्र तैयार कर देता है, जो स्वस्थ कोशिकाओं (सेल) को विकिरण के धमाकों से बचाता है।
कोशिका मानव शरीर की सबसे छोटी इकाई है। कई कोशिकाएँ मिलकर उत्तक (टिसू) बनाती हैं और उत्तकों का समूह अलग-अलग अंग बनाता है।
निशाने पर ट्यूमर : विज्ञान पत्रिका 'साइंस' में प्रकाशित वैज्ञानिकों के शोध नतीजे छपे हैं और जल्दी ही इसका मानव परीक्षण होने वाला है। विकिरण से कोशिकाओं को नुकसान पहुँचता है और वे मृत हो जाती हैं।
कैंसर के मरीजों में क्षतिग्रस्त कोशिकाओं को दूसरी घातक कोशिकाएँ भी निगलती हैं। एक खतरा ये भी होता है कि ट्यूमर कोशिकाओं के आसपास की स्वस्थ कोशिकाएँ भी रेडियोथेरेपी के दौरान मारी जा सकती हैं, इसीलिए इलाज के दौरान जहाँ तक संभव होता है रेडियोलॉजिस्ट सीधे ट्यूमर को ही निशाने पर लेने की कोशिश करते हैं।
शोधकर्ताओं ने दवा बनाने से पहले इस बात का गहराई से अध्ययन किया कि किस तरह कुछ कैंसर कोशिकाएँ रेडियोथेरेपी के बावजूद बची रह जाती है।
जानवरों में इसके प्रयोग से पता चला कि यह अस्थि मज्जा और आहार नली की स्वस्थ कोशिकाओं को विकिरण के दुष्प्रभाव से बचाता है, लेकिन ट्यूमर कोशिकाओं को इस दवा से कोई फायदा नहीं होता और ये कोशिकाओँ रेडियोथेरेपी में निशाना बना ली जाती हैं।
दूसरा पहलू : कोशिकाओं को मरने से बचाने का एक खतरा यह है कि ख़राब कोशिकाएँ भी ज्यादा रह सकती हैं और आगे चलकर कैंसर का कारण बन सकती हैं। हालाँकि शोधकर्ताओं को चूहे पर इस दवा के परीक्षण के दौरान इस तरह का कोई संकेत नहीं मिला।
साथ ही शोधकर्ताओं को साफ तौर पर इस दवा का कोई दूसरे तरह का असर (साइड इफेक्ट) भी नजर नहीं आया। स्वस्थ कोशिकाओं को विकिरण के प्रभाव से बचा लेने के कारण इस दवा का इस्तेमाल करके कैंसर के रोगी ज्यादा मात्रा और लंबे समय तक रेडियोथेरेपी का भी लाभ उठा सकेंगे।
यह दवा परमाणु आपदा या नाभिकीय बमों के विकिरण से भी लोगों को बचाने में मददगार हो सकता है। क्लीवलैंड के लेर्नर रिसर्च इंस्टीट्यूट के डॉ. एंड्रेई गुडकोव कहते हैं हमने दिखाया है कि विकिरण से पहले और विकिरण के बाद इस्तेमाल करने पर यह दवा प्रभावशाली है।
संक्षेप में कहें तो सीबीएलबी 502 ट्यूमर कोशिका को बिना सुरक्षा दिए विकिरण के बुरे असर को कम करती है और विकिरण के कारण पैदा होने वाले कैंसर के कारकों को कोई बढ़ावा नहीं देती है।
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यह दवा आदमी के अंदर एक ऐसा जैव-वैज्ञानिक तंत्र तैयार कर देता है, जो स्वस्थ कोशिकाओं (सेल) को विकिरण के धमाकों से बचाता है।
कोशिका मानव शरीर की सबसे छोटी इकाई है। कई कोशिकाएँ मिलकर उत्तक (टिसू) बनाती हैं और उत्तकों का समूह अलग-अलग अंग बनाता है।
निशाने पर ट्यूमर : विज्ञान पत्रिका 'साइंस' में प्रकाशित वैज्ञानिकों के शोध नतीजे छपे हैं और जल्दी ही इसका मानव परीक्षण होने वाला है। विकिरण से कोशिकाओं को नुकसान पहुँचता है और वे मृत हो जाती हैं।
कैंसर के मरीजों में क्षतिग्रस्त कोशिकाओं को दूसरी घातक कोशिकाएँ भी निगलती हैं। एक खतरा ये भी होता है कि ट्यूमर कोशिकाओं के आसपास की स्वस्थ कोशिकाएँ भी रेडियोथेरेपी के दौरान मारी जा सकती हैं, इसीलिए इलाज के दौरान जहाँ तक संभव होता है रेडियोलॉजिस्ट सीधे ट्यूमर को ही निशाने पर लेने की कोशिश करते हैं।
शोधकर्ताओं ने दवा बनाने से पहले इस बात का गहराई से अध्ययन किया कि किस तरह कुछ कैंसर कोशिकाएँ रेडियोथेरेपी के बावजूद बची रह जाती है।
जानवरों में इसके प्रयोग से पता चला कि यह अस्थि मज्जा और आहार नली की स्वस्थ कोशिकाओं को विकिरण के दुष्प्रभाव से बचाता है, लेकिन ट्यूमर कोशिकाओं को इस दवा से कोई फायदा नहीं होता और ये कोशिकाओँ रेडियोथेरेपी में निशाना बना ली जाती हैं।
दूसरा पहलू : कोशिकाओं को मरने से बचाने का एक खतरा यह है कि ख़राब कोशिकाएँ भी ज्यादा रह सकती हैं और आगे चलकर कैंसर का कारण बन सकती हैं। हालाँकि शोधकर्ताओं को चूहे पर इस दवा के परीक्षण के दौरान इस तरह का कोई संकेत नहीं मिला।
साथ ही शोधकर्ताओं को साफ तौर पर इस दवा का कोई दूसरे तरह का असर (साइड इफेक्ट) भी नजर नहीं आया। स्वस्थ कोशिकाओं को विकिरण के प्रभाव से बचा लेने के कारण इस दवा का इस्तेमाल करके कैंसर के रोगी ज्यादा मात्रा और लंबे समय तक रेडियोथेरेपी का भी लाभ उठा सकेंगे।
यह दवा परमाणु आपदा या नाभिकीय बमों के विकिरण से भी लोगों को बचाने में मददगार हो सकता है। क्लीवलैंड के लेर्नर रिसर्च इंस्टीट्यूट के डॉ. एंड्रेई गुडकोव कहते हैं हमने दिखाया है कि विकिरण से पहले और विकिरण के बाद इस्तेमाल करने पर यह दवा प्रभावशाली है।
संक्षेप में कहें तो सीबीएलबी 502 ट्यूमर कोशिका को बिना सुरक्षा दिए विकिरण के बुरे असर को कम करती है और विकिरण के कारण पैदा होने वाले कैंसर के कारकों को कोई बढ़ावा नहीं देती है।
