राजस्थान-सिंध बस सेवा की आस
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उनका कहना है कि पाकिस्तान में एक चुनी हुई सरकार ने काम शुरू कर दिया है। जल्द ही दोनों मुल्कों की बैठक में ये मुद्दा सामने आएगा। सरहद के उस तरफ सड़क नहीं होना इस बस सेवा प्रारंभ होने में एक बड़ी बाधा थी, अब उस तरफ सड़क बनकर तैयार हो गई है। हम चाहेंगे की बाड़मेर और मीरपुर खास(सिंध) के बीच बस सेवा शुरू हो और लोग इसका लाभ उठाएँ।
कोई चालीस साल पहले इस मार्ग पर बसें दौड़ती थीं और लोगों को मिलाती थीं, लेकिन 1965 में जब भारत-पाकिस्तान में जंग छिड़ी तो, दोनों देशों के बीच आई तल्खी ने इस बस सेवा की बलि ले ली। फिर कभी ये बस सेवा शुरू नहीं हो पाई। कुछ साल पहले पूर्व विदेश मंत्री जसवंतसिंह के नेतृत्व में एक दल पहली बार इस सड़क मार्ग से सिंध गया था।
उस समय दोनों तरफ के लोगों को लगा था कि काश वो पुराने दिन फिर लौट आएँ जब सड़क मार्ग से लोगों का आना-जाना शुरू हो।
पहले चलती थी बस...
मानवेंद्रसिंह कहते है कि ये दोनों राज्यों के बीच एक पारम्परिक मार्ग रहा है और पहले तो वाहनों के अलावा पैदल यात्री भी जा सकते थे। जैसलमेर के एक गाँव में रहने वाले लालदीन कहते है कि अगर ये सड़क मार्ग खुल जाए तो हम सब इसका स्वागत करेंगे क्योंकि बस मार्ग सस्ता और कम समय लेने वाला होगा।
लालदीन जैसे हजारों लोग हैं, जो इस राह के आसन होने की बाट जोह रहे हैं। दोनों देशों के रिश्ते जब सुधरने शुरू हुए तो कोई चार दशक बाद इस मार्ग थार एक्सप्रेस पटरी पर लौटी। कभी इस मार्ग से ऊँटों पर काफिले इधर से उधर आवाजाही करते थे। मगर अब वो इतिहास की बात हो गई।
बहरहाल लोग इससे भी खुश होंगे की इस मार्ग पर फिर से बसों की आमद शुरू हो और इन्सानी रिश्तों का हॉर्न इस मरुस्थल में दोस्ती की सदा बुलंद करे।
