ब्रिटेन की पुलिस और सामाजिक कार्यकर्ता अगर 12 साल की रुखसाना की गुहार सुन लेते तो उसकी जिंदगी कुछ और ही होती।
रुखसाना (नाम बदला हुआ है) का कहना है कि उसने शिकायत की थी कि उसके पिता उसे पाकिस्तान ले जा कर जबरन विवाह करा देना चाहते हैं, लेकिन किसी ने उसकी बात को गंभीरता से नहीं लिया।
रुखसाना का कहना है कि उसे एक ऐसे देश ले जाया गया, जो उसका अपना नहीं था और वहाँ उसकी शादी एक ऐसे इन्सान से कर दी गई जिसने लगातार बेदर्दी से उसका बलात्कार किया और पंद्रह साल की उम्र में वह गर्भवती हो गई।
किसी तरह से भागने में कामयाब होने के बाद अब रुखसाना इंग्लैंड के एक शरणार्थी गृह में अपने बच्चे के साथ जीवन गुजार रही है।
रुखसाना को अफसोस इस बात का है कि उसे अपनी पढ़ाई छोड़नी पड़ी। वह कहती है कि जब मैं स्कूल में थी तो अंग्रेजी, गणित और विज्ञान में मेरे सबसे ज्यादा अंक आते थे। मैं यूनिवर्सिटी जाना चाहती थी, लेकिन स्कूल ही पूरा नहीं कर पाई।
घरेलू हिंसा की जानकारी : एक बार उसके स्कूल में घरेलू हिंसा के बारे में एक लेक्चर हुआ था और उसे बताया गया कि अगर उन बच्चियों के साथ ऐसा हो तो उन्हें क्या करना चाहिए।
कुछ दिन बीतने पर जब रुखसाना को एहसास हुआ कि उसके साथ जबरदस्ती होने जा रही है तो उसने पुलिस को फोन किया। वह कहती है कि पुलिस वालों को मैंने बताया कि मेरे पिता मुझे पाकिस्तान ले जा कर जबरदस्ती मेरी शादी करा देना चाहते हैं, तो उन्होंने मुझसे कहा कि मैं घबराऊँ नहीं। वे ऐसा कुछ नहीं होने देंगे।
उसके बाद पुलिस आई जरूर लेकिन रुखसाना से अलग से बात करने के बजाय उसके घरवालों के सामने उससे पूछताछ हुई। जाहिर है, इससे नतीजा यही निकला कि रुखसाना ने शिकायत की है और जो काम कुछ रुक कर होना था उसमें तेजी आ गई।
एक दिन रुखसाना के पिता ने कहा कि वे सब छुट्टियाँ मनाने पाकिस्तान जा रहे हैं और महीने-दो महीने में वापस आ जाएँगे।
अब कुछ नहीं हो सकता : रुखसाना कहती है कि विमान में सवार होने के बाद उसे बताया गया कि वहाँ उसकी शादी होने जा रही है और अब वह कुछ नहीं कर सकती। पाकिस्तान में शादी के बाद भी रुखसाना सोचती रही कि ब्रिटेन की पुलिस उसकी तलाश में जरूर आएगी।
वह सोचती थी स्कूल वाले उसे ढूँढेंगे, लेकिन कोई नहीं आया। मैं अकेली यह सब झेलती रही। दो साल बाद वह ब्रिटेन आई और वहाँ उसने अपने बच्चे को जन्म दिया।
उसका पति भी आया लेकिन वह उसकी ओर निष्ठुर ही बना रहा और अंततः रुखसाना ने उससे अलग होने का फैसला कर लिया। घर वालों ने इज्जत की दुहाई दी लेकिन रुखसाना किसी तरह वहाँ से भाग आई और उसने बेसहारा लोगों के लिए बनाए गए एक गृह की शरण ले ली।
अब वह अपने रिश्तेदारों से बचती फिर रही है क्योंकि उसे डर है कि उस पर यह ठप्पा लगा दिया गया है कि उसकी वजह से घरवालों का सिर नीचा हुआ है। वह अपनी दुर्दशा के लिए अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराती है।
अगर सुन लिया होता... "अगर उन्होंने मेरी बात पर ध्यान दिया होता तो मेरी जिंदगी ऐसी न होती। मुझे लगता है यहाँ की पुलिस और सामाजिक कार्यकर्ताओं को जबरन शादी के बारे में मालूम नहीं है या उन्हें लगता है कि यह एशियाइयों का मामला है और गोरों के साथ तो होता नहीं है।
वह कहती है कि गोरों के बच्चे सहायता के लिए फोन करते हैं तो उनकी बात सुनी जाती है, लेकिन एशियाई बच्चे ऐसा करें तो उसे शिकायत माना जाता है।
उसे अपने माँ-बाप से भी शिकायत नहीं है। वह कहती है कि वे जानते हैं कि इस्लाम में जबरन विवाह गलत माना जाता है, लेकिन वे परंपराओं से बँधे हैं। उन्हें लगता है कि यह ठीक है क्योंकि उनके साथ भी ऐसा ही हो चुका है।
अपने इस अनुभव के बावजूद रुखसाना अब भी अपने जैसे लोगों को यही सलाह देती है कि ऐसी स्थिति में अधिकारियों से मदद माँगें।
उसे उम्मीद है कि अब जबरन विवाह के बारे में इतना प्रचार हो जाने के बाद शायद पुलिस और अन्य अधिकारी इस बारे में जागरूक हो गए होंगे और इस तरह की गुहार को गंभीरता से लेंगे।
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