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सौभाग्यवती का सौभाग्य व्रत WD
सौभाग्यवती का सौभाग्य व्रत

यह कार्तिक कृष्ण पक्ष को चंद्रोदय व्यापिनी चौथ को किया जाता है। यह स्त्रियों का मुख्य त्योहार है। सौभाग्यवती स्त्रियाँ स्वपति के रक्षार्थ यह व्रत करती हैं तथा रात्रि में शिव, चंद्रमा, स्वामी कार्तिकेय आदि के चित्रों एवं सुहाग की वस्तुओं की पूजा करती हैं। पहले चंद्रमा उसके नीचे शिव तथा कार्तिकेय आदि के चित्र दीवार पर पीसे ऐपन से बनाना चाहिए। इस दिन निर्जल व्रत करें। चंद्र दर्शन के बाद चंद्र को अर्घ्य देकर भोजन करना चाहिए। पीली मि‍ट्‍टी की गौरा बनानी चाहिए। कोई-कोई स्त्रियाँ परस्पर चीनी या मिट्‍टी का करवा आदान-प्रदान करती हैं तथा कहानी सुनती हैं।

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करवा चौथ
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सदियों से कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चौथी तिथि को करवा चौथ के रूप में मनाया जाता है। इसे करक, करवा, करूआ या करूवा अनेक नामों से जाना जाता है। कई स्थानों पर इसे करवा गौर के नाम से भी पहचाना जाता है। करवा मिट्टी या धातु से बने हुए लौटे के आकर के एक पात्र को कहते हैं, जिसमें टोंटी लगी होती है। करवा चौथ का व्रत स्त्रियाँ अपने सुखमय दाम्पत्य जीवन के लिए रखती हैं। शास्त्रों में दो विशिष्ट...
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