| | फागुन का त्योहार प्यार, त्याग, द्वेषरहित, आपसी मेल मिलाप, मस्ती और तरंग लेकर आता है, और सभी को उत्साह से भर देता है। बच्चों की तैयारी तो कई दिन पहले से ही होने लगती है। वे तरह-तरह पिचकारियाँ, रंग और गुलाल खरीदने लगते हैं। बच्चों के साथ बड़े भी पूरे उत्साह से जुट जाते हैं। पर यह कोई नहीं सोचता कि होली में इस्तेमाल किए जाने वाले रासायनिक तेजाबी रंग हमारी त्वचा व स्वास्थ्य के लिए हानिकारक सिद्ध हो सकते हैं।
होली के अवसर पर प्रयोग में आने वाले रंगों को मुख्यतः तीन प्रकारों में बाँटा जा सकता है। जो हैं तेजाबी रंग, मूल रंग, मिश्रित अथवा हलका रंग। |