लाल साड़ी में लिपटी, स्वर्णाभूषणों में दमकती लक्ष्मी कमल के पुष्प पर विराजती हैं। आसपास खड़े सफेद हाथी उनका अभिवादन करते हैं। वे धन, संपदा, सौभाग्य, सौंदर्य, सत्ता, ऐश्वर्य, विलास, उर्वरता और मंगल की देवी हैं। वे अग्नि की भाँति द्युतिमान, स्वर्ण की तरह कांतिमय,सूर्य की तरह दैदीप्यमान भी हैं। कौन नहीं चाहता लक्ष्मी को? लक्ष्मी का आकर्षण प्रबल है। हर कोई चाहता है कि उसके पास धन-धान्य की प्रचुरता रहे, वैभव-विलास उसके पास आए। किंतु लक्ष्मी ठहरी चंचला! उन्हें थामे रखने के लिए कई प्रयास करने पड़ते हैं। लक्ष्मी है तो 'श्री' है। या कहो लक्ष्मी ही हैं 'श्री'। श्री से ही.... |