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सोम पुष्य नक्षत्र में खरीददारी के शुभ मुहूर्त

पुष्य नक्षत्र का विशेष फल

सोम पुष्य नक्षत्र
- ज्योतिर्विद डॉ.रामकृष्ण डी. तिवारी

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विष्णुजी के प्रिय मास में लक्ष्मी की उपासना एवं कामना करने वालों के लिए इस मास में पड़ने वाले पुष्य नक्षत्र का विशेष फल है। इस वर्ष का यह नक्षत्र सर्वार्थसिद्धि योग से युक्त होकर रवि व सोमवार द्वारा अलंकृत है। रविवार से प्रारंभ होने के फलस्वरूप सोम पुष्य का दर्जा ऊँचा करता है।

सोमवार को सूर्योदय के पूर्व से शुरू होकर वार के अंतिम काल तक यह योग बनेगा। इसलिए इस पर्व पर सोमवार को अपनी कुल परंपरा के अनुसार बही का क्रय करना, कलम लाना, व्यापार के वर्षपर्यंत उपयोग की सामग्री शुभ मुहूर्त में लाने से श्रेष्ठ व्यापारिक कर्म के योग पूरे आर्थिक साल में बनते हैं। दान करना भी इस दिन श्रेष्ठ होता है। इस विधि से शुभकाल में कर्म करने से उसका फल निश्चित गुणा में मिलता है।

इसमें शुभ मुहूर्त में क्रय करने का समय इस प्रकार है-

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अमृत चौघि़ड़या प्रातः 6.02 से 7.50 इसमें क्रय करने से पहले घर से जाते समय दही का सेवन करना चाहिए।

शुभ चौघि़ड़या प्रातः 9.18 से 10.45 तक है। इसमें पहले देव दर्शन करके क्रय करने जाना चाहिए।

चर दिन 1.40 से 3.07 में क्रय करने जाते समय धूप (अगरबत्ती) जलाकर जाना चाहिए।

लाभ दिन 3.07 से 4.34 में क्रय करने के लिए गु़ड़ व धनिया का सेवन करके जाना चाहिए।

अमृत सायं 4.34 से 6.02 में क्रय करने पर देवता को च़ढ़े पुष्प पास में रखकर जाना चाहिए।

चर सायं 6.02 से 7.35 में क्रय करने जाने पर इत्र लगाकर जाना चाहिए।

स्थिर लग्न प्रातः 9.03 से दिन 11.18 में खरीददारी करने पर लाल कप़ड़े या लाल रुमाल जेब में रखकर अथवा रक्त चंदन का तिलक लगाकर जाना चाहिए।

कुंभ लग्न का काल दिन में 3.10 से 4.44 तक रहेगा, इसमें खरीददारी करते समय कलश के दर्शन करके कार्य करना शुभ फलदायी रहता है।

वृषभ स्थिर लग्न का समय रात्रि 7.55 से 9.33 मि. तक है। इस समय श्वेत वस्त्र पहन करके या देवता को सफेद फूल व चावल च़ढ़ा करके सोम पुष्य नक्षत्र का लाभ लेना चाहिए।