ग्रहण में जन्मे बच्चे कैसे होंगे?
खग्रास सूर्यग्रहण में जन्मे बालक का भविष्य
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खग्रास सूर्यग्रहण में जन्मे बच्चों के बारे में पिछले दिनों बहुत कुछ छपा। इस विषय पर हमने भी कुछ ज्योतिषियों की राय ली। आइए जानें उनके विचार व पिछले दिनों हुए ग्रहण के समय जन्मे बालक का भविष्यफल।
भानपुरा के ज्योतिष पं. विकास सामूरिया का कहना है कि ग्रहण के वक्त जन्म लेने वाले बच्चे पर तत्काल असर नहीं होता है। ग्रहों का प्रभाव उसके जीवन में युवावस्था में ही पड़ेगा।
बुरहानपुर के अशोक किशन पाटिल ने बताया कि जो लोग नहीं मानते हैं, वे बाद में पछताते हैं। ग्रहण का प्रभाव पशु-पक्षी पर हो सकता है तो मानव पर क्यों नहीं?
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महू के मो. यूसुफ अली कुरैशी ने कहा कि ग्रहण के समय गर्भवती महिला यदि कोई वस्तु या सब्जी वगैरह काटती है तो उसके होने वाले बच्चे पर प्रभाव अवश्य पड़ेगा।
पिछले दिनों हुए ग्रहण के समय कर्क लग्न व तुला नवांश था। तब जन्मा बालक पुष्य नक्षत्र वज्र योग व नागकरण में चाँदी के पाए में हुआ था। इस समय ग्रहों की स्थिति इस प्रकार थी लग्न में सूर्य, चन्द्र, बुध व केतु द्वितीय भाव में सूर्य की राशि में शनि सप्तम भाव में, राहु अष्टम भाव में, शनि कुंभ राशि पर गुरु एकादश भाव में स्वराशिस्थ शुक्र व शत्रु राशिस्थ मंगल थे।
ग्रहों की स्थिति शुक्र को छोड़कर सभी प्रतिकूल थी। जहाँ लग्न व लग्नेश चन्द्र, धन कुटुम्ब, वाणी, बचत भाव का स्वामी सूर्य, तृतीय पराक्रम, भाई, मित्र, शत्रु व द्वादश व्यय बाहरी संबंध भाव का स्वामी बुध केतु के साथ होने से इस बालक को उपर्युक्त भावों से संबंधित परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। द्वितीय भाव में शत्रु शनि की राशि पर सूर्य के होने से धन, कुटुम्ब के मामलों में बाधा रहेगी। सप्तम भाव में राहु शनि की राशि मकर में होने से अपने जीवन साथी के मामलों में समस्याओं का सामना करना पड़ेगा।
इधर भाग्य का स्वामी व शत्रु कर्ज व नाना-मामा भाव का स्वामी गुरु अष्टम में होने से भाग्य में रुकावट, कर्ज, शत्रुओं से बाधा रहेगी। एकादश में स्वराशि शुक्र व शत्रु राशि का मंगल आय के मामलों मे मिले-जुले परिणाम देगा। शनि मंगल का दृष्टि संबंध दाम्पत्य जीवन में, विद्या के क्षेत्र में व्यापार या सर्विस के क्षेत्र में बाधा का कारण बनेगा। इनका सबसे अधिक प्रभाव अशुभ ग्रहों की दशा-महादशा, अंतर्दशा में देखने को मिलेगा।
