मुख्य पृष्ठ > धर्म-संसार > ज्योतिष > आलेख
सुझाव/प्रतिक्रियामित्र को भेजियेयह पेज प्रिंट करें
 
शादी के लिए आठ दिन का मुहूर्त
नवंबर में गूँजेंगी शहनाई
ND
आँखों में शादी के सपने संजोने वाले युवक-युवतियों के लिए फिलहाल मात्र आठ दिन का समय बाकी है। मई में तारा अस्त होने और उसके बाद चातुर्मास के कारण अब सीधे नवंबर में शादियों की शहनाई गूँजेगी। यानी अभी नहीं तो फिर सात महीने का लंबा इंतजार करना प़ड़ेगा।

शुक्र का तारा अस्त होने, शुक्र के बाल्यत्र दोष के प्रभाव में आने और इसके बाद चातुर्मास होने से यह स्थिति बनी है। महाकाल ज्योतिष एवं अनुसंधान केंद्र के ज्योतिर्विद पं. कृपाशंकर व्यास के अनुसार विवाह के लिए केवल 28 अप्रैल तक शुभ मुहूर्त हैं।

2 मई को शुक्र अस्त होगा और 12 जुलाई को शुक्र का उदय होगा, जबकि उदय होने के तीन दिन बाद यानी 15 जुलाई तक शुक्र बाल्यत्र दोष के प्रभाव में रहेगा। इसलिए इस अवधि में शुभ कार्य करना दोषपूर्ण रहता है। 13 जुलाई को देवशयनी एकादशी से चातुर्मास के कारण चार महीने तक विवाह नहीं होंगे।

इस प्रकार अब सीधे 21 नवंबर को देवशयनी एकादशी से विवाह शुरू होंगे। डॉ. रामकृष्ण डी. तिवारी के अनुसार शुक्र अस्त होने के कारण देश के मध्यक्षेत्र में विवाह वर्जित रहेंगे, लेकिन दक्षिण भारत और पंजाब प्रांत में विवाह होंगे।
  आँखों में शादी के सपने संजोने वाले युवक-युवतियों के लिए फिलहाल मात्र आठ दिन का समय बाकी है। मई में तारा अस्त होने और उसके बाद चातुर्मास के कारण अब सीधे नवंबर में शादियों की शहनाई गूँजेगी। यानी अभी नहीं तो फिर सात महीने का लंबा इंतजार करना प़ड़ेगा।      


ये हैं शुभ तिथियाँ
ND
श्री सिद्ध विजय पंचांग के अनुसार 20, 21, 23, 27 और 28 अप्रैल विवाह की शुभ तिथियाँ हैं। इसके बाद मुहूर्त नवंबर में है। हालाँकि महाराष्ट्रीय पंचांगों में 30 अप्रैल तक विवाह के मुहूर्त बताए गए हैं। इसके अलावा 11 मई को आने वाली भ़ड़ली नवमी पर भी कई जगह विवाह के आयोजन होते हैं।

कुछ ज्योतिषियों में तारीखों को लेकर मतभे
विवाह की तारीखों को लेकर कुछ ज्योतिषियों में मतभेद हैं। अलग-अलग पंचांग में अलग-अलग मुहूर्त दिए गए हैं। कुछ पंचांगों में 28 अप्रैल तक विवाह के शुभ मुहूर्त बताए गए हैं जबकि कुछ ज्योतिषियों का कहना है कि तारा अस्त होने से पहले तक यानी 2 मई तक विवाह होंगे। 2 मई की रात्रि में शुक्र अस्त होने के बाद शुभ कार्य वर्जित हो जाएँगे।
और भी
भाग्य विधाता नहीं, मनुष्य लिखता है
प्राचीन विधा का आधुनिक स्वरूप श्रीराम शलाका
टैरो कार्ड की रहस्यमयी दुनिया से-
प्लव नाम संवत्सर सत्तापक्ष व जनता के लिए कष्टकारी
बुध, शुक्र देगा कन्‍या लग्‍न को राजयोग
बगैर मंगल वाले वर-वधू की शादी हो सकती है