विशेष : दशाधिकारियों का फल सर्वत्र होता है लेकिन राजा का फल कश्मीर, अफगानिस्तान एवं बराड़ देश में मंत्री का फल आंध्र, उज्जैन, मालवा में, सस्येश का विदर्भ में, धान्येश का गुजरात व नर्मदा के तटवर्ती प्रदेश एवं मध्यप्रदेश में, मेद्येश का मगध एवं बंगाल में, रसेश का कोंकण व गोआ में, नीरसेश का मालवा व बिहार में, धनेश का राजस्थान एवं बाड़मेर में, फलेश, दुर्गेश एवं राजा का सब जगह विशेष होता है। इस वर्ष संवत् 2065 विक्रम संवत् में सूर्य व चंद्र द्वारा शासित वर्ष है। आकाश मंडल में 6 पद क्रूर ग्रहों को प्राप्त हैं वहीं सोम्य ग्रहों को पद कम हैं। इसलिए आकाशीय ग्रह परिषद् सत्ता संतुलित नहीं है। शुभ ग्रहों को केवल चार पद ही प्राप्त हैं। भारत में अनेक प्रांतों में वर्षेश सूर्य होने से शुभ ग्रहों को तीन पद रहते हैं। संवत् 2065 में ग्रह परिषद् असंतुलित हो जाने के कारण विश्व के बड़े एवं मुस्लिम देशों में अधिटत घटना चक्र चलेगा।
कहीं-कहीं प्रमुख शासक राष्ट्राध्यक्ष की हत्या या निधन जैसी घटना हो सकती है। कुछ देशों, प्रांतों के नेताओं के लिए संकटीय स्थितियों से गुजरना पड़ सकता है। जहाँ चंद्र वर्षेश है वहाँ धान की पैदावार अधिक होगी। नए नेतृत्व का उदय होगा, राष्ट्रीयकृत पार्टियों को बल भी मिलेगा। जहाँ वर्षेश सूर्य है वहाँ चोरी, अग्निकांड आदि से हानि के योग बनते हैं।
नीरसेश एवं धनेश पद मंगल के पास होने से दलित वर्ग के प्रतिनिधि शनि को मेद्येश व फलेश एवं सब मुख्य पद सेनानायक के रूप में दुर्गेश पद प्राप्त है। महँगाई चरम पर पहुँचेगी। वायदा बाजार में काफी उठापटक होने से स्थिति बिगड़ेगी। कुछ क्षेत्रों में अकाल, बाढ़ जैसे हालात बनेंगे। कुछ देशों में युद्ध जैसी स्थिति से पड़ोसी राष्ट्र भयाक्रांत रहेंगे। मंत्री पद शनि के आधिपत्य में होने से सत्तापक्ष में भारी उलटफेर करा सकता है। कई राष्ट्रों में आपसी मतभेद कहीं आंतरिक अशांति, राष्ट्राध्यक्ष पर संकट के बादल मंडराते नजर आएँगे। विशेषकर मुस्लिम राष्ट्रों में होगा।
वामपंथी दल व दलित वर्ग का सहयोगी मायावती राजनीति में काफी उलटफेर करने की ताकत रखते नजर आएँगे। आगामी वर्ष सत्तापक्ष के लिए व जनता के लिए कुछ कष्टकारी रहेगा। सत्तापक्ष सत्ता से हट सकते हैं तो महँगाई से जनता परेशान रहेगी।
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