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एकादेश मंगल
सप्तम हो तो जीवनसाथी से लाभ
ऐसे जातक का जीवन हिम्मतवान, महत्वाकांक्षी व जीवनसाथी से लाभ पाने वाला होता है। सूर्य साथ हो तो तेजस्वी स्वभाव का होता है। जीवनसाथी से वाक् युद्ध होता रहता है। लेकिन प्रेम भी बना रहता है।

चंद्र साथ हो तो पत्नी या पति से धन अच्छा मिलता है। साहसी, हिम्मतवान होता है। बुध साथ हो तो ऐसा जातक लेखक, प्रकाशक होता है। साथ ही उसकी वाक् शक्ति अच्छी होती है। पति-पत्नी में तालमेल अच्छा रहता है। गुरु साथ हो तो ऐसे जातक उत्तम विचारों से युक्त सद्‍गुणी, व्यवहारकुशल, सच्चे मित्र होते हैं। शुक्र साथ हो तो प्रेम विवाह संभव है। पति या पत्नी सुंदर हो। शनि साथ हो तो दाम्पत्य जीवन नष्ट हो सकता है या अलग-अलग रहने की नौबत आती है। राहु साथ हो तो आपस में नहीं बनती। तलाक भी संभव है।

केतु साथ हो तो परिणाम ठीक रहेंगे। लेकिन जीवनसाथी थोड़ा जिद्दी स्वभाव का होता है। एकादशेश मंगल अष्टम भाव में हो तो मांगलिक होने पर भी विशेष प्रभाव नहीं रहता। आयु उत्तम होगी, लेकिन आर्थिक मामलों में मिली-जुली स्थिति रहती है। मित्रों, भाइयों से ‍मदद मिलती है। चंद्र साथ हो तो धन के मामलों में‍ मिली-जुली स्थिति रहती है। बुध साथ हो तो भाग्योन्नति में रुकावट आती है। प्रयत्नपूर्वक अच्छी सफलता नहीं मिल पाती।

गुरु साथ हो तो पति-पत्नी में कलह, बार-बार स्थानांतरण होता रहता है। स्थायित्व की कमी रहती है। शुक्र साथ हो तो ऐसा जातक भोगी किस्म का होता है। विद्या में रुकावटें आती रहती हैं। शनि साथ हो तो आयु तो ठीक रहती है लेकिन एक्सीडेंट के योग बनते रहते हैं। राहु साथ हो तो गुप्त रोग संभव। केतु साथ होने पर ऑपरेशन की नौबत आती है।
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