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बेटी का पत्र, पिता के नाम....

आदरणीय पापा, 
चरण स्पर्श।
 
कैसे हैं? आशा करती हूं कि आप स्वस्थ और प्रसन्न होंगे। जीवन में काफी लगाव, प्रेम और आपके प्रति सम्मान रहा। संकोच की सीमाओं के बीच कभी शब्दों के जरिए जता या बता नहीं पाई, लेकिन आज जब सोच रही थी कि फादर्स-डे पर आपको उपहार क्या दूं? तो सोचा कि जिस पिता ने मुझे काबिल बनाने और हमेशा खुश रखने में अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया, उनके लिए शायद किसी उपहार से  ज्यादा संतान की उनके प्रति प्रेम और भावनाओं की अभिव्यक्ति अनमोल होगी।
 
 
 
इसीलिए मैं अपनी अमूल्य भावनाएं, जो सिर्फ आपके लिए हैं, उन्हें व्यक्त कर रही हूं। पापा, एक बेटी होने के नाते हमेशा से ही मेरा झुकाव आपकी तरफ अधि‍क रहा है और आज भी मां से ज्यादा आपसे ज्यादा पटरी बैठती है मेरी।जब भी मां बचपन में डांटती तो आप अपने पास बुलाकर दुलार दिया करते थे। मां ने किसी चीज के लिए मना किया, तो चोरी-चुपके आप ही फरमाइशें पूरी कर दिया करते थे। हर शौक मेरा आपने पूरा किया और हर छोटी-बड़ी उपलब्धि‍ पर मेरा उत्साह बढ़ाते रहे। जब भी मेरी हिम्मत जरा भी कहीं कम पड़ती दिखाई दी, तो हौसला आपने ही दिया।
 
ये कहकर कि 'तुम करो, आगे बढ़ो/ मैं हूं ना तुम्हारे साथ, फिर किस बात की चिंता?' आपके इन शब्दों ने जीवन की किसी भी कठिन और असमंजसभरी परिस्थिति में मेरा साथ नहीं छोड़ा और मैं संघर्ष के दिनों में भी दुगने आत्मविश्वास के साथ खड़ी हुई और अपनी लड़ाई जारी रखी।आज भी समय कैसा भी हो, चाहे कोई साथ खड़ा हो न हो। मुझे ये विश्वास है कि आप हर पल मेरे साथ खड़े हैं और दुनिया की कोई ताकत मुझे डिगा नहीं सकती। 

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