Thu, 23 Jul 2026

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कौन था सरबजीत सिंह....

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पाकिस्तान में कैद भारतीय नागरिक को पाकिस्तान ने ब्रेन डेड घोषित कर दिया। सरबजीत सिंह 22 साल से पाकिस्तान की कैद में था। सरबजीत सिंह पर लाहौर की कोट लखपत जेल में कैदियों ने हमला कर दिया था, इसके बाद से वह जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहा था।

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सरबजीत सिंह भारत-पाकिस्तान सीमा पर बसे तरनतारन जिले के भिखीविंड गांव का रहने वाला ‍किसान था। 30 अगस्त 1990 को वह अनजाने में पाकिस्तानी सीमा में पहुंच गया था। पाकिस्तान आर्मी ने उसे गिरफ्तार कर लिया।

लाहौर और फैसलाबाद में हुए बम धमाके का आरोपी बनाकर सरबजीत सिंह को जेल में बंद कर दिया गया। इस बम हमले में 14 लोगों की जान गई थी। 1991 में बम धमाके आरोप में सरबजीत सिंह को फांसी की सजा सुनाई गई।

पांच बार पाकिस्तान राष्ट्रपति के सामने सरबजीत सिंह ने दया याचिका लगाई, लेकिन इन याचिकाओं पर फैसला नहीं हो सका। सरबजीत के परिवार में पत्नी सुखप्रीत कौर और दो बेटियां स्वप्न और पूनम कौर है।

सरबजीत की बहन दलबीर कौर ने भी अपने भाई की रिहाई के लिए खूब प्रयास किए, लेकिन वे सफल नहीं हो सकीं। परिवार वालों का कहना है कि वह नशे में सीमा के पार पहुंच गया था। सरबजीत का पत्र मिलने के बाद पता चला कि सरबजीत सिंह को पाकिस्तानी सेना ने सीमा पर गिरफ्तार कर ‍लिया है।

सरबजीत को मंजीत मान सजा सुनाई : पाकिस्तान सरकार सरबजीत को मंजीत सिंह मानती है। एंटी टेररिज्म कोर्ट ने 15 सितंबर 1991 को उसे मंजीत सिंह के नाम पर सजा ए मौत सुनाई। पाकिस्तान ने जिस मंजीत सिंह के शक में सरबजीत को गिरफ्तार किया, वह भारत में ही है। एक समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार मंजीत सिंह रत्तू को हरियाणा पुलिस ने 16 दिसंबर 2009 को हरियाणा के पंचकुला से एक फ्रॉड के केस में गिरफ्तार किया था।

मंजीत की असली कहानी : मंजीत सिंह एक सजायाफ्ता मुजरिम है। हालांकि उसने 2009 में पाकिस्तान में हुए विस्फोटों के आरोपों से इं‍कार किया था। मंजीत को कनाडा में ठगी के मामले में दो साल की सजा हो चुकी है। उसके बारे में यह भी दावा किया जाता है कि उसने कनाडा, भारत, और पाकिस्तान में अलग-अलग शादियां की हैं।



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