इंश्यूरेंस में है एश्योरेंस
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जे.एम. योगानंद मूर्तिअन्य देश की तुलना में हमारे देश में बीमा की अवधारणा पर कभी भी गंभीरता से विचार नहीं किया गया था। अभी भी अधिकांश आबादी बीमा सुरक्षा की छतरी से बाहर ही है। विकसित देशों में जहाँ जीवन बीमा प्रीमियम और सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का औसत 8 प्रतिशत है, वहीं हमारे यहाँ यह मात्र 1.4 प्रतिशत ही है।जीवन और गैर जीवन बीमा कंपनियों द्वारा इस समय जीवन बीमा के साथ-साथ मोटर, मेरिन, फायर, हेल्थ और व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा, वाहन, कृषि और खेल बीमा में सेवाएँ प्रदान की जा रही हैं। इन सेवाओं को सुचारु रूप से चलाने के लिए विभिन्ना बीमा कंपनियों ने प्रचार तथा जनसंपर्क विभाग, विकास विभाग, कार्मिक विभाग, लेखा विभाग, एक्युरियल विभाग, सचिवालय विभाग विधिक विभाग, निवेश विभाग, निरीक्षण विभाग, बंधक (मार्टगेज) विभाग, सतर्कता विभाग, विदेश विभाग, कार्पोरेट प्लानिंग विभाग, भवन विभाग आदि स्थापित किए हैं, जहाँ विभिन्ना पदों पर रोजगार की अपार संभावनाएँ उपलब्ध हैं।कार्य की प्रकृतिबीमा कंपनियों के विभिन्ना विभागों के कर्मचारियों द्वारा अपने-अपने दायित्वों के अनुरूप कार्य निष्पादित किया जाता है। बीमा से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण पद तथा उनसे जुड़े दायित्व निम्नानुसार हैं-प्रशासन अधिकारी तथा सहायक प्रशासन अधिकारीप्रशासन अधिकारी तथा सहायक प्रशासन अधिकारी क्लास वन समूह के अधिकारी होते हैं। इनकी नियुक्ति बीमा कंपनियों पर 6 माह की परिवीक्षा पर की जाती है। इस दौरान इन्हें बीमा क्षेत्र की कार्य प्रणालियों का प्रशिक्षण एवं ज्ञान दिया जाता है। सहायक अधिकारी प्रशासन, विकास औरलेखों में से किसी भी क्षेत्र का चयन कर सकता है। प्रशासन में वह नीति निर्धारण, कतिपय सीमा तक पॉलिसी दावों का निपटान, शर्तों तथा विवरणों की जाँच विवरणिकाओं की प्रस्तुति जैसे कार्य करता है। विकास सहायक प्रशासन अधिकारी मार्केटिंग, बिजनेस की खरीदी, पॉलिसियों के प्रमोशन और अनुबंध प्राप्त करने जैसे काम करता है। लेखा विभाग से जुड़ा अधिकारी कार्पोरेशन के आय-व्यय का हिसाब रखता है। तीन वर्ष की सेवा के पश्चात इन्हें प्रशासन अधिकारी के पद पर पदोन्नाति के साथ कुछ और अधिकार मिल जाते हैं तथा पूरे भारत में उन्हें कहीं भी पदस्थ किया जा सकता है। इन्हें प्रारंभिक वेतन लगभग 2.5 लाख रुपए वार्षिक मिलता है जो पदानुसार क्रमशः बढ़ता जाता है। पात्रता तथा भर्ती प्रक्रिया- सहायक प्रशासन अधिकारी के पद पर आवेदन करने वाला 21 तथा 28 वर्ष के बीच आयु सीमा में होना चाहिए तथा उसके पास न्यूनतम 50 प्रश अंकों से स्नातक, स्नातकोत्तर उपाधि होनी चाहिए। मुख्यतया परीक्षाएँ केंद्रीय कार्यालयों द्वारा आयोजित की जाती हैं जिसमें दो पर्चे होते हैं। पहला वस्तुनिष्ठ प्रश्नों पर तथा दूसरा निबंधात्मक होता है। ऑब्जेक्टिव प्रश्नपत्र बौद्धिकता, शीघ्रता, क्वांटिटेटिव, एप्टीट्यूट टेस्ट गणित, लॉजिकल सामान्य ज्ञान पर आधारित होता है तथा निबंधात्मक प्रश्नपत्र में अँगरेजी ज्ञान का परीक्षण किया जाताहै। लिखित परीक्षा में चयनित छात्रों को बोर्ड द्वारा साक्षात्कार के माध्यम से चुना जाता है।स्रोत:नईदुनिया अवसर
डेवलपमेंट ऑफिसर विकास अधिकारी दूसरी श्रेणी का अधिकारी होता है। वह अपने क्षेत्र में बीमा पॉलिसियों के विकास के लिए जिम्मेदार होता है। यह एजेंटों को नियुक्त करता है तथा उन्हें पॉलिसियों की बिक्री के लिए प्रशिक्षण देता है। बाद में एजेंट भी विकास अधिकारी बन सकते हैं। इन्हें प्रारंभिक वेतन लगभग 1.25 लाख रुपए वार्षिक मिलता है जो पदानुसार क्रमशः बढ़ता जाता है। पात्रता तथा भर्ती प्रक्रिया : विकास अधिकारी के प्रत्याशी की शिक्षा स्नातक एवं आयु सीमा 21 तथा 26 वर्ष के बीच होनी चाहिए। पात्र प्रतियोगियों की गणित और अँगरेजी ज्ञान की लिखित परीक्षा ली जाती है। पात्र उम्मीदवारों का चयन बोर्ड द्वारा आयोजित साक्षात्कार के माध्यमसे किया जाता है। बाद में 1 वर्ष का प्रशिक्षण दिया जाता है। अन्य जॉब प्रथम तथा द्वितीय श्रेणी अधिकारी के अलावा बीमा कंपनियों में असिस्टेंट्स, टाइपिस्ट, मशीन ऑपरेटर, स्टेनोग्राफर, टेलीफोन ऑपरेटर, डाटा एंट्री ऑपरेटर और क्लर्क के पदों पर भी नियुक्ति दी जाती है। ये समूह 'ग' या तृतीय वर्ग कर्मचारी होते हैं। इनकी नियुक्ति डिवीजनल ऑफिस से होती है। 18 से 25 वर्ष आयु वाले 10+2 उत्तीर्ण छात्र इसमें हिस्सा ले सकते हैं। इसमें अनुसूचित जाति/ जनजाति, विकलांगों तथा पूर्व सैनिकों के लिए आरक्षण होता है। निजी कंपनियों में फिलहाल इस तरह का आरक्षण नहीं है। इसके अलावा बीमा कंपनियों में बाहरी सेवा द्वारा निम्नलिखित लोगों से कार्य कराए जाते हैं- 1.
बीमा एजेंट, 2. सर्वेयर इन्हें इनकी सेवाओं के एवज में अच्छा पारिश्रमिक दिया जाता है। करियर संभावनाएँ इस समय विभिन्ना बीमा कंपनियों में लाखों कर्मचारी कार्यरत हैं। विदेशी बीमा कंपनियों के आगमन से कॉर्पोरेट क्षेत्र, स्टॉक ब्रोकिंग फर्मों, फाइनेंस कंपनियों और शिपिंग कंपनियों का कामकाज भी बढ़ गया है। इन दोनों में रोजगार के विभिन्ना अवसर भी उपलब्ध हैं। बीमा व्यवसाय के फलस्वरूप निम्नलिखित क्षेत्रों में करियर निर्माण के द्वार खुल गए हैं-स्रोत: नईदुनिया अवसर
एक्चुरियल- यह बीमा व्यवसाय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह बीमा तथा वित्त संबंधी समस्याओं का हल खोजकर वित्तीय प्रबंधन तथा योजनाएँ तैयार करता है। गणित अथवा सांख्यिकी स्नातकों के लिए यह अच्छा क्षेत्र है। आने वाले समय में इनकी अच्छी माँग होगी तथा 70 हजार प्रतिमाह से लेकर 1 लाख प्रतिमाह तक पारिश्रमिक मिलने की संभावना है। अंडरराइटिंग- यह सेवा गैर जीवन बीमा से संबंधित है। अंडरराइटर बीमा क्षेत्र के जोखिमों का आकलन कर जोखिम प्रबंधन का दायित्व संभालता है। आमतौर पर मेडिकल बीमा करने वाली विदेशी कंपनियों को इनकी आवश्यकता होती है। इनका शुरुआती वेतन 50 हजार रुपए प्रतिमाह के लगभग होता है। मार्केटिंग और डिस्ट्रीब्यूशन- बीमा उत्पादों की मार्केटिंग कोई आसान काम नहीं है। इसके लिए ख्यातिप्राप्त संस्थान की विशेष उपाधि यथा एमबीए होना आवश्यक है। आपरेशंस- बीमा कंपनियों का सारा कामकाज कम्प्यूटर पर आधारित है। इसके लिए इस क्षेत्र में इंफोटेक प्रोफेशनल्स के लिए बेहतर संभावनाएँ पैदा होने लगी हैं। सॉफ्टवेयर प्रोफेशनल्स को बीमा कंपनियों में सम्मानजनक काम और आकर्षक वेतन मिलना सामान्य है। निवेश- बैंकों तथा म्युचुअल फंडों की तरह ही बीमा क्षेत्र में भी निवेश क्षेत्र से जुड़े प्रोफेशनल्स की आवश्यकता होगी। इस तरह बीमा का क्षेत्र इन दिनों में करियर निर्माण का महत्वपूर्ण क्षेत्र बनकर उभर रहा है जिसमें लाखों युवाओं को मनचाहा काम और आकर्षक पारिश्रमिक सुनिश्चित है।भारतीय जीवन बीमा निगम देता है रोजगार के सुनहरे अवसरभारतीय जीवन बीमा निगम की स्थापना सन् 1956 में हुई थी। यह देश का ही नहीं, बल्कि विश्व का सबसे बड़ा बीमा संस्थान है, जो 22 करोड़ से अधिक बीमाधारकों को अपनी सेवाएँ प्रदान कर रहा है जिसका लाइफ फंड 6 लाख 74 हजार करोड़ रु. हो चुका है। भारतीय जीवन बीमा निगम की कुल 2 हजार 48 शाखाओं में 12 लाख से अधिक अभिकर्ता कार्यरत हैं जिनकी मासिक आय हजारों से लेकर लाखों में है।स्रोत: नईदुनिया अवसर