दिल्ली गैंगरेप: ‘गांव की बेटी’ को शहर ने मार दिया

नई दिल्ली| भाषा|
PTI
पूरे देश को झकझोर देने वाले दिल्ली कांड की पीड़ित लड़की के बारे में लोग कितना जानते हैं? उसे कोई दामिनी कहता है, कोई निर्भया तो कोई देश की बहादुर बेटी। दरअसल वह लड़की उत्तरप्रदेश के बलिया के पास मेड़वरा कलां गांव की रहने वाली थी।

बेहद ही गरीब परिवार की इस लड़की के पिता ने सपना देखा था कि लड़की को पड़ा-लिखाकर बड़ा डॉक्टर बनाना है ताकि हमने जो गरीबी और अभाव के दिन देखें है वह यह दिन न देखते हुए खुशहाल जिंदगी जिए। इसीलिए उसके पिता और उसका सपना था- डॉक्टर बनना।

पैरा-मेडिकल की इस छात्रा की पढ़ाई के लिए उसके पिता ने उनका खेत बेच दिया था और बेटी को पढ़ाने के लिए दिल्ली भेजा था, लेकिन उन्हें क्या मालूम था कि दिल्ली दिल दहलाने वाले बर्बर लोगों की राजधानी है।
उत्तरप्रदेश और बिहार की सीमा से सटे मेड़वरा कलां गांव में रहने वाले उसके चाचा लालजी ने बताया कि उनकी भतीजी मुफलिसी में जी रहे अपने परिवार के लिए उम्मीद की किरण थी।

उन्होंने बताया कि बेहद गरीब परिवार में जन्मी उनकी भतीजी बहुत जहीन और संघषर्शील थी। उसकी योग्यता और लगन को देखते हुए उसके पिता ने उसे ऊंची तालीम दिलाने के लिए अपना पुश्तैनी खेत भी बेच दिया था।
उन्हें पूरा यकीन था कि एक दिन उनकी बेटी परिवार को ना सिर्फ गरीबी से निकालेगी बल्कि उसे तरक्की की राह पर ले जाएगी, लेकिन वक्त के जालिम हाथों ने सभी उम्मीदों को चकनाचूर कर दिया।

हैवानियत की शिकार हुई लड़की के चाचा लालजी ने कहा कि उनके खानदान की बेटी के गुनहगारों को जब तक फांसी नहीं होती तब तक उनका परिवार न्याय के लिए संघर्ष करता रहेगा। पीड़िता के एक चाचा न्याय विभाग में उच्च पद पर हैं जबकि दूसरे केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल में कार्यरत हैं लेकिन पीड़िता के पिता बेहद ही गरीबी में जीवन जी रहे थे।
गौरतलब है कि गत 16 दिसम्बर को चलती बस में सामूहिक बलात्कार की शिकार हुई 23 वर्षीय लड़की की आज तड़के भारतीय समयानुसार दो बजकर 15 मिनट पर सिंगापुर के माउंट एलिजाबेथ अस्पताल में मृत्यु हो गयी। (एजेंसियां)

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