- स्वामी रामदेव अष्टांग योग धर्म, अध्यात्म, मानवता एवं विज्ञान की प्रत्येक कसौटी पर खरा उतरता है। इस दुनिया के खूनी संघर्ष को यदि किसी उपाय से रोका जा सकता है तो वह 'अष्टांग योग' ही है। अष्टांग योग में जीवन के सामान्य व्यवहार से लेकर ध्यान एवं समाधि सहित अध्यात्म की उच्चतम अवस्थाओं का अनुपम समावेश है।संसार के सभी व्यक्ति सुख व शांति चाहते हैं। विश्व के सम्पूर्ण राष्ट्र भी इस बात पर सहमत हैं कि विश्व में शांति स्थापित होनी चाहिए। प्रतिवर्ष इसी उद्देश्य से ही एक व्यक्ति को जो शांति स्थापित करने के लिए समर्पित होता है, नोबेल पुरस्कार प्रदान किया जाता है। वैसे, शांति कैसे स्थापित हो, इस बात को लेकर सभी असमंजस की स्थिति में हैं। सभी लोग अपने-अपने विवेक के अनुसार इसके लिए कुछ चिंतन करते हैं, परंतु एक सर्वसम्मत मार्ग नहीं निकल पाता। कोई कहता है जिस दिन इस धरती पर केवल अमुक धर्म होगा उस दिन सभी सुख हो जाएँगे। कोई कहता है यदि सब किसी भगवान की शरण में आ जाएँ तो सर्वत्रा सुख और शांति हो जाएगी।भारत में तो कई सम्प्रदायों, मत-पंथों एवं गुरुओं की भरमार है और सभी यह दावा करते हैं कि उनके द्वारा निर्दिष्ट पथ पर चलकर ही विश्व में सुख और शांति संभव है। इन सब मत-पंथों एवं संप्रदायों में वह उदात्तता, व्यापकता व समग्रता नहीं है जिससे कि मानव मात्रा उनको अपना सके। इन सबकी अपनी-अपनी सीमाएँ हैं।दुनिया में तथाकथित धर्मों की एकछत्र स्थापना हेतु खूनी संघर्ष भी हुए परन्तु परिणाम कुछ भी नहीं निकला। अशांति बढ़ती ही जा रही है। इसका अर्थ है दुनिया के लोग जिन उपायों पर विचार कर रहे हैं, उनमें सार्थकता तो है परंतु परिपूर्णता, समग्रता व व्यापकता नहीं।इन प्रचलित मत-पंथों, संप्रदायों एवं तथाकथित धर्मों को अपनाने से जहाँ व्यक्ति को एक ओर थोड़ी शांति मिलती है, वहीं इन संप्रदायों के पचड़े में पड़कर व्यक्ति कुछ ऐसे झूठे अंधविश्वासों, कुरीतियों एवं मिथ्या आग्रहों में फँस जाता है, जिनसे निकलना मुश्किल हो जाता है।क्या ऐसे कुछ नियम-मान्यताएँ व मर्यादाएँ हो सकती हैं, जिन पर पूरी दुनिया के सभी व्यक्ति चल सकें? जिससे किसी भी व्यक्ति व राष्ट्र की एकता व अखंडता खंडित नहीं होती हो और न ही किसी का व्यक्तिगत स्वार्थ सिद्ध होता हो, जिसको प्रत्येक व्यक्ति अपना सकता हो और जीवन में पूर्ण सुख, शांति व आनंद प्राप्त कर सकता हो?एक ऐसा पथ जिस पर निर्भय होकर पूर्ण स्वतंत्रता के साथ दुनिया का प्रत्येक इंसान चल सकता है और जीवन में पूर्ण सुख, शांति व आनंद को प्राप्त कर सकता है। यह है महर्षि पतंजलि प्रतिपादित अष्टांग योग का पथ। यह कोई मत-पंथ या संप्रदाय नहीं अपितु जीवन जीने की संपूर्ण पद्धति है। यदि संसार के लोग वास्तव में इस बात को लेकर गंभीर है कि विश्व में शांति स्थापित होनी ही चाहिए तो इसका एकमात्र समाधन है अष्टांग योग का पालन। अष्टांग योग के द्वारा ही वैयक्तिक व सामाजिक समरसता, शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक शांति एवं आत्मिक आनंद की अनुभूति हो सकती है।अष्टांग योग धर्म, अध्यात्म, मानवता एवं विज्ञान की प्रत्येक कसौटी पर खरा उतरता है। इस दुनिया के खूनी संघर्ष को यदि किसी उपाय से रोका जा सकता है तो वह 'अष्टांग योग' ही है। अष्टांग योग में जीवन के सामान्य व्यवहार से लेकर ध्यान एवं समाधि सहित अध्यात्म की उच्चतम अवस्थाओं का अनुपम समावेश है।आगले पेज पर पढ़ें कैसे पाई जा सकती है शांति....साभार : योग संदेश (दिव्य योग मंदिर ट्रस्ट)सौजन्य : डायमंड कॉमिक्स प्रकाशन समूहयह भी देखें:-शंख प्रक्षालन या शंख धौतिमस्तिष्क को रखें शांतप्रसन्न रहने के तरीकेशांति की तलाश |