आज शिक्षक दिवस है। दिवसों की भीड़ में एक और दिवस! कहने को आज मैं आपकी शिक्षिका हूँ, किंतु सच तो यह है कि जाने-अनजाने न जाने कितनी बार मैंने आपसे शिक्षा ग्रहण की है।कभी किसी के तेजस्वी आत्मविश्वास ने मुझे चमत्कृत कर दिया तो कभी किसी विलक्षण अभिव्यक्ति ने अभिभूत कर दिया । कभी किसी की उज्ज्वल सोच से मेरा चिंतन स्फुरित हो गया तो कभी सम्मानवश लाए आपके नन्हे से उपहार ने मुझे शब्दहीन कर दिया।
कक्षा में अध्यापन के अतिरिक्त जब मैं स्वयं को उपदेश देते हुए पाती हूँ तो स्वयं ही लज्जित हो उठती हूँ। मैं कौन हूँ? क्यों दे रही हूँ ये प्रवचन? आप लोग मुझे क्यों झेल रहे हैं...
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