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माँ है ईश्वर, माँ ही प्रार्थना WD
माँ है ईश्वर, माँ ही प्रार्थना

माँ एक अनुभूति, एक विश्वास, एक रिश्ता नितांत अपना सा। गर्भ में अबोली नाजुक आहट से लेकर नवागत के गुलाबी अवतरण तक, मासूम किलकारियों से लेकर कड़वे निर्मम बोलों तक, आँगन की फुदकन से लेकर नीड़ से सरसराते हुए उड़ जाने तक, माँ मातृत्व की कितनी परिभाषाएँ रचती है। स्नेह, त्याग, उदारता औदार्य और सहनशीलता के कितने प्रतिमान गढ़ती है? कौन देखता है? कौन गिनता है भला? और कैसे गिने? ऋण, आभार, कृतज्ञता जैसे शब्दों से परायों को नवाजा जाता है। माँ तो अपनी होती है, बहुत अपनी सी। हम स्वयं जिसका अंश हैं, उसका ऋण कैसे चुकाएँ...

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मातृ दिवस
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माँ क्या कहती हैं...
पूरे विश्व की जनन‍ी है माँ। अगर एक नारी ना होती तो शायद भगवान भी सोच में पड़ जाते कि इस दुनिया की रचना कैसे की जाए। भगवान ने नारी को बनाकर और उसे माँ के वात्सल्यपूर्ण शब्द से नवाज कर पूरी दुनिया पर एक बहुत ही बड़ा उपकार किया है। इस शब्द की अपने आपमें एक बहुत ही खास महिमा है। वह माँ जो पहले एक बेटी, बहन, बीवी, बहू और फिर माँ बनकर अपनी पूरी जीवनभर की जिम्मेदारियों को बखूबी निभाती है। उसकी इस...
तुझे सब है पता, है ना माँ....
बेसन की सोंधी रोटी
दो शब्द
शफीक़ माँ है !
ख्वाब
बच्चे की माँ
मातृत्व दिवस पर फोटोगैलरी
विविध
माँ...
तेरे आँगन में...
माँ तुझे सलाम
बेटी का पत्र माँ के नाम
अगले जन्म में भी माँ तू ही मिले
इस खुशी से वंचित न करो
बस एक माँ है जो ख़फ़ा नहीं होती
आप स्मृतियों में बसी रहेंगी
पत्र माँ के नाम
मेरी शक्ति मेरी माँ !
माँ : बच्चे की प्रथम गुरु
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