गीता के उपदेश की सार्थकता इसी में थी कि अर्जुन युद्ध करने के लिए तैयार हो जाए। वह पूरे मनोयोग से युद्ध करने के लिए न केवल तत्पर ही हुआ अपितु महाभारत युद्ध के विजेता का गौरव भी प्राप्त कर सका। उस समय केवल एक अर्जुन था, परन्तु आज की परिस्थिति में प्रत्येक भारतवासी को अर्जुन बनना पड़ेगा तभी भगवान श्रीकृष्ण की आराधना एवं गीता का अध्ययन-मनन सार्थक हो सकेगा। महाभारत काल में वैदिक ज्ञान-विज्ञान प्रायः लुप्त हो चुका था और तात्कालीन सामाजिक व्यवस्था लड़खड़ा गई थी। इनके स्थान पर आत्मा के सच्चे स्वरूप के विषय में सामाजिक... |