वर्ष 1947 में आजादी मिलने के बाद देश ने लोकतांत्रिक व्यवस्था को अपनाया और भारत को एक लोकतांत्रिक गणराज्य बनाने की शुरुआत की गई थी। स्वतंत्रता के 61 वर्ष बाद ऐसा लगता है कि देश ने लोकतांत्रिक मूल्यों को आत्मसात करने के साथ-साथ कुछेक ऐसी प्रवृत्तियों को भी जन्म दिया है जो कि देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए बहुत बड़ा खतरा साबित हो रही हैं। देश के लगभग हर हिस्से में अलोकतांत्रिक व्यवहार और हिंसा का बोलबाला है। मजबूत लोकतांत्रिक विशेषताओं के साथ हमारी सफलता पर हम गर्व कर सकते हैं, लेकिन इसके साथ विरोधाभास यह भी है कि इस व्यवस्था के चलते दे... |