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अभावों की पूर्ति है सच्ची मित्रता ND
अभावों की पूर्ति है सच्ची मित्रता

महानगरीय सभ्यता के युवा शायद सहमत न हों मगर वास्तविकता यह है कि उनकी 'मित्रता' की अवधारणा और वास्तविक 'मित्रता' की अवधारणा में बुनियादी फर्क है। सायबर कैफे से उपजी यह पीढ़ी इंटरनेट पर चैटिंग, डिस्को, बार और फाइव स्टार होटलों की देर रात खत्म होनेवाली पार्टियों में साथ-साथ उठने-बैठने, घूमने और साथ-साथ 'वीक-एंड' मनाने भर को ही 'दोस्ती' समझती है। इसीलिए इन्हें स्वयं पता नहीं होता कि ये सफर कब, कहाँ और कैसे यूँ ही छोटी-सी बात पर खत्म हो जाएगा दुआ क्या थी जहन में ये तो याद नहीं बस दो हथेलियाँ थीं, जुड़ी आपस में....

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मित्रता दिवस
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आओ बनाएँ कुछ अच्छे दोस्त
हर किसी के जीवन में कभी ना कभी कुछ ऐसे पल आते हैं जब वो अपने आप को हज़ारों लोगों के बीच में रहकर भी अकेला पाता है। अपने दफ्तर में या किसी पार्टी में भी उसे यही महसूस होता है कि वह कितना अकेला है। वह व्यक्ति अपने इस अकेलेपन का ज़िम्मेदार उन लोगों को मानने लगता है जो उससे बात नहीं करते या उसके दोस्त नहीं बनना चाहते....
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