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सृजन, एक गुलाबी सुख ND
सृजन, एक गुलाबी सुख

छोटा-सा तुलसी बिरवा। नन्ही-सी हरी कच एक नाजुक पत्ती। जब रोपा तो एक साथ कई स्वर उठे 'नहीं पनपेगा', 'जड़ नहीं पकड़ेगा'। मन का प्रबल विश्वास 'चेतेगा, पनपेगा, जरूर पनपेगा।' आत्मा की हर भावुक लहर से उसे सिंचित किया। संपूर्ण एकाग्रता से पोषित किया। बिरवे की आत्मा तक पहुँचने की कोमल कोशिश की। कब मिट्‍टी पलटना है, तपन भी जरूरी है। गोबर के उपले की खाद हाथों से बनाई.... और जिस दिन नर्म मुलायम पत्ती ने शरमाकर हल्का-सा सिर ऊँचा किया - आत्मा के सुप्त तारों में एक साथ कई रागिनियाँ बज उठीं रोम-रोम छनन...छुम थिरक उठा। यह है सृजन सुख। एक ऐसा विलक्षण गुलाबी सुख....

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विश्व पर्यावरण दिवस
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पर्यावरण की समस्याओं पर विशेषज्ञों के विचार एवं विवाद इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में देखते व सुनते हैं। आज पर्यावरण दिवस है इसलिए आज हम सब इस दिन को याद कर रहे हैं। हालाँकि अब हम क्या करें कि किस प्रकार से पर्यावरण के बुरे प्रभावों को दूर कर सके। हमें इसके लिए जरूर कुछ करना चाहिए अन्यथा हम यूरोपीय देशों को देखें जोकि पहले से अधिक गर्मी महसूस कर रहे हैं। समुद्र तटों पर स्थित महानगरों को अब भयंकर स्थिति का सामना...
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