महान व्यक्तियों और प्रतापी व्यक्तियों की कांस्य और मार्बल की प्रतिमा स्थापित की जाती है, लेकिन उस ईश्वरीय व्यक्ति ने अपने पूरे जीवनकाल में क्रांतिकारी प्रबंधन किए हैं, जोकि करोड़ों और करोड़ो लोगों के दिलों में रच-बस गए हैं, इसलिए हम सभी थोड़े-बहुत वैसे हो जाएँ जिससे वो बने थे, फिर भी अनंत का तुच्छ हिस्सा हैं। उनका विस्तार पूरे भारत में था, केवल जगहों पर या किसी चुनिंदा स्थानों पर, या एसेंबली में नहीं, लेकिन प्रत्येक गाँव में और उन दबे-कुचले लोगों के हृदय में और उन लोगों में जो दु:खी हैं। वो करोड़ों लोगों के दिलों में रहते हैं और हमेशा रहेंगे। ...वो चले गए, और पूरे देश की यही भावना है कि वो इसे सूना और उजाड़... |