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इजहार-ए-इश्क
रोमांस
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ऐसे प्यार की कोई जगह नहीं
भारतीय समाज में इंसान की मूलभूत जरूरतों के बाद विवाह को बेहद जरूरी माना जाता है। समाजशास्त्री डॉ. सुधा सुरेश सिलावट बताती हैं इस तरह का निर्णय मान्य होना भारतीय समाज के विघटन की शुरुआत को दर्शा रहा है।
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प्रेम कथाएँ
रेत के कणों का मिलन
प्यार की सीढ़ियाँ
तलाश... जो पूरी न हुई
आज भी है उतना ही शाश्‍वत...
ऐसा प्यार और कहाँ?
तुम्हें क्यों न चाहे मन?
सत्य पर रखें प्यार की नींव
आ जी लें एक पल में सौ जनम
 
और भी
प्रेम-गीत
रोमांस
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तुम बहुत याद आते हो
शरद रात्रि में, प्रश्नाकुल मन, बहुत उदास, कहता है मुझसे उठो, चाँद से बातें करो और मैं, बहने लगती हूँ ...
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प्रेम गुरु
रोमांस
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शादी को बनाएँ अफेयर प्रूफ
कहते हैं इश्क कब, कहाँ और किससे हो जाए यह कोई नहीं जानता। शादीशुदा स्त्री और पुरुष जब इश्क के चक्कर में पड़ते हैं तो कई जिंदगियाँ दाँव पर लग जाती हैं और हाथ आती है बदनामी...बदनामी... और सिर्फ बदनामी।
प्यार की केमिस्ट्री का फॉर्मूला
थोड़ा इंतजार का मजा लीजिए
रूह की खुराक है 'मोहब्बत
प्रेम से महकाएँ दांपत्य
रिश्तों की परिपक्वता से बढ़ता प्यार
तुम्हें हो गया है प्यार...