भारतीय समाज में इंसान की मूलभूत जरूरतों के बाद विवाह को बेहद जरूरी माना जाता है। समाजशास्त्री डॉ. सुधा सुरेश सिलावट बताती हैं इस तरह का निर्णय मान्य होना भारतीय समाज के विघटन की शुरुआत को दर्शा रहा है।
कहते हैं इश्क कब, कहाँ और किससे हो जाए यह कोई नहीं जानता। शादीशुदा स्त्री और पुरुष जब इश्क के चक्कर में पड़ते हैं तो कई जिंदगियाँ दाँव पर लग जाती हैं और हाथ आती है बदनामी...बदनामी... और सिर्फ बदनामी।