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अमरजीत सिंह : पंजाब के ख्यात चित्रकार
प्रश्न : पेंटिंग के भविष्य के बारे में आप क्या सोचते हैं या सरकारों को इस तरफ ध्यान देना चाहिए, ताकि कला और भी प्रफुल्लित हो?
उत्तर : 19वीं सदी में जब कैमरा आया तो कैमरे ने पेंटिंग को बहुत नुकसान पहुँचाया। इसके कारण प्रसिद्ध पेंटरों को इसका विकल्प तलाशना पड़ा, क्योंकि पेंटिंग और कैमरे में ज्यादा अंतर नहीं रहा। पिकासो ऐब्सट्रैक्ट आर्ट पेंटिंग की तरफ बढ़ा और ऐब्सट्रैक्ट आर्ट का भविष्य उज्ज्वल है। बड़े शहरों में पेंटिंग्स नीलामी द्वारा बिकती हैं, जिनसे अच्छी आमदनी हो रही है। छोटा चित्रकार खप रहा है और उसके भविष्य की कोई संभावना नहीं दिखाई दे रही है। उसे काफी संघर्ष करना पड़ रहा है। उनके भविष्य का कोई ठिकाना नहीं है।

सरकारों का ध्यान राजनीति की तरफ होता है। कला की तरफ सरकारें काफी कम ध्यान देती हैं। सरकारों को सियासती खेल खेलने की बजाय कला का ख्याल करना चाहिए। पंजाब सरकार तो इस विषय पर कोई काम ही नहीं कर रही है। उसे जिले में एक कला म्यूजियम तथा एक ऑर्ट गैलरी बनाना चाहिए, ताकि कला की भलाई हो सके और लोगों को सुकून भी मिलेगा।

प्रश्न : मुंबई हमले में मकबूल फिदा हुसैन के बनाए हुए चित्र क्षतिग्रस्त हो गए थे। वे अब उन्हें पुन: चित्रित कर रहे हैं। इस बारे आपका क्या मानना है ?
उत्तर : आतंकी कार्रवाई तो बुरी ही होती है। वह चाहे दुनिया के किसी भी हिस्से में हो, चाहे वह हिस्सा अमेरिका हो या भारत का। मुंबई के ताज होटल पर पिछले दिनों हुए हमले से जहाँ कई लोगों को जान गँवाना पड़ी और विश्व के प्रख्यात चित्रकार फिदा हुसैन के चित्र क्षतिग्रस्त हो गए, ऐसे आतंकी कृत्यों की सदा भर्त्सना करना चाहिए। यह अच्छी बात है कि हुसैन उन चित्रों को दोबारा ठीक कर रहे हैं।

प्रश्न : भविष्य में आपकी कौन-कौन से चित्र बनाने की योजना है?
उत्तर : मेरी योजना श्रीगुरु ग्रंथ साहब के मार्गदर्शन पर चित्र बनाने की है और इस पर मैंने काम शुरू कर दिया है। इसके अलावा मैं आने वाले समय में साहित्यकार, पंजाब से जुड़े सभ्याचार या पंजाब में जो देशभक्ति आंदोलन हुए हैं, जैसे कामागाटा मारू, बब्बर अकाली लहर या जलियाँवाला बाग के अनजान शहीदों के बारे में चित्र बनाने की योजना बना रहा हूँ।

प्रश्न : कला से जुड़े लोगों को क्या संदेश देना चाहेंगे, ताकि वे कला को और अधिक फैला सकें?
उत्तर : मनुष्य को रोजी-रोटी के लिए कुछ करना ही पड़ता है, जबकि कला नि:स्वार्थ होकर ही करना पड़ती है, तभी इसमें उन्नति कर सकते हैं। मैं कलाकार भाइयों से यही कहूँगा कि वे समय निकालकर उक्त कला में अपना योगदान दें। साथ ही उन्हें लगातार काम करते रहना चाहिए। यह लहर सतत चलती रहे और मुश्किलों का सामना किया जाता रहे।

प्रश्न : आपकी प्रदर्शित हो चुकी पेंटिंग्स तथा सरकार से आपको मिले सम्मान के बारे में बताएँ ?
उत्तर : पंजाब में बड़ा पेंटिंग प्रदर्शन हो चुका है। सरकारी सम्मान मिलता रहता है, लेकिन जो प्यार लोगों से मिलता है, वही बहुत बड़ा सम्मान होता है।
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