रात गए लफ्जों1 की बरसात हुईएक मुरस्सा2 नज्म हमारी जात हुई आंधी आई रस्ते में बरसात हुईअपनी मंजिल जैसे अपने साथ हुई छत के ऊपर सावन में भी धूप रहीछत के...
मुद्दत से था इंतजार, लो चल बसा। यारो तुम्हारा यार, लो चल बसा।। ख़ाली पेट ही खाता रहा धोखे।कितना था होशियार, लो चल बसा।।