बरसात की रुमानियत बढ़ाते, फिल्मी गाने...

अदृश्य है, इसे देखा नहीं जा सकता। इसे केवल महसूस किया जा सकता है।लेकिन इसे महसूस करने के बावजूद जताने का तरीका हमें खुद कभी नहीं आया। लेकिन जिंदगी में कोई बात, कोई वक्त या मौसम ऐसा होता है, जो खुद ब खुद प्रेम के होने का आभास करा देता है। का मौसम भी इनमें शुमार है, जब ठंडी फुहारें, मन को भिगोकर प्रेम की ठंडक पैदा करती हैं और ये एहसास दिलाती हैं, कि ये मौसम प्रेम और सौंदर्य का है...

शायद इसीलिए प्रेम की अभिव्यक्ति को नए नए स्वरूप में पेश करने वाला सिनेमा जगत भी कहीं इससे अछूता नहीं है। बल्कि फिल्मों के जरिए ही को बरसात के मौसम से जोड़कर देखा जाता रहा है। यही कारण है कि फिल्मी दुनिया के प्यार भरे तराने आज भी हमारे जहन में उसी एहसास के साथ जिंदा है। फिर चाहे वह, अमिताभ बच्चन और स्मिता का आज रपट जाए, तो हमें न बुलैयो हो,
या फिर अनिल कपूर का भरी बारिश में मनीषा के साथ रिमझिम-रिमझिम, रूमझुम-रूमझुम...भीगी भीगी रूत में तुम-हम, हम-तुम गाना..  > बरसात के मौसम में प्यार की रूमानियत से नायिकाएं भी अछूती नहीं रही, जयाप्रदा की फिल्म का यह गाना - बरसात में जब आएगा सावन का महीना, साजन को बना लूंगी अंगूठी का नगीना ..तो कुछ यही दर्शाता है। >  
वहीं नायकों का आकर्षण भी भीगी रातों से होकर गुजरता है- एक लड़की भीगी भागी-सी, सोती रातों में जागी सी का जिक्र कर नायक अपनी फिक्र जाहिर कर ही देता है। 

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