अंतरिक्ष में बढ़ते कचरे का बड़ा खतरा

Last Updated: गुरुवार, 20 अप्रैल 2017 (11:11 IST)
यूरोपीय स्पेस एजेंसी ने अंतरिक्ष में इकट्ठा होते जा रहे कचरे से निपटने में अंतरराष्ट्रीय सहयोग किए जाने की मांग की है। कचरे से अंतरिक्ष में घूम रहे उपग्रहों के लिए खतरा पैदा हो गया है।
अंतरिक्ष में धरती से भेजे गए कई अलग अलग कक्षाओं में घूम रहे हैं। साथ ही घूम रहा है कई तरह का कचरा भी। ऐसे कचरे के महंगे महंगे उपग्रहों से टकरा कर उन्हें नुकसान पहुंचाने का खतरा भी बढ़ रहा है।

यूरोपीय स्पेस एजेंसी (ईएसए) के प्रमुख यान वोएर्नर ने जर्मन शहर डार्मश्टाट में आयोजित अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में कहा, इस बारे में "कोई देश अकेला कुछ भी नहीं कर सकता।" उन्होंने जोर देकर कहा कि "हमें ये साफ हो चुका है कि अंतरिक्ष में कचरे की समस्या एक बहुत गंभीर बात है।"
1993 से ही हर चार साल पर ईएसए ऐसी कॉन्फ्रेंस आयोजित करता है। इस चार दिन के आयोजन में करीब 400 इंजीनियर, वैज्ञानिक और यूनिवर्सिटियों के प्रबंधक हिस्सा लेते हैं। साथ ही अंतरिक्ष में अपने लोगों को भेजने वाले देशों से भी प्रतिनिधि डार्मश्टाट के सैटेलाइट कंट्रोल सेंटर में आते हैं।

अंतरिक्ष में यह कचरा भी असल में इंसान की ही करनी है। अक्सर सैटेलाइट या रॉकेटों के टूटे या बचे खुचे हिस्से ही अंतरिक्ष का बड़ा कचरा बनते हैं। ईएसए अधिकारी बताते हैं कि इस बड़े कचरे के अलावा भी करीब 750,000 ऐसी छोटी चीजें अंतरिक्ष में घूम रही हैं, जो एक से 10 सेंटीमीटर के व्यास वाली होंगी।
ऐसी कई छोटी चीजों से भी खतरा काफी बड़ा है। ये आमतौर पर बहुत तेज गति से घूमती हैं, जिसका मतलब हुआ कि इस रफ्तार पर छोटे से छोटा टुकड़ा भी विमान या उपग्रह जैसी चीज को नष्ट कर सकता है।

इसी साल जापान का अंतरिक्ष के कचरे को साफ करने का एक प्रयोग विफल हो गया। उम्मीद की जा रही थी कि पांच दशक की मानवीय गतिविधियों से अंतरिक्ष में जो भी कचरा जमा हुआ है उसे धीरे धीरे नीचे लाया जाएगा और पृथ्वी के वातावरण में प्रवेश करते ही वह खुद ही जलकर नष्ट हो जाएगा। लेकिन कचरा साफ करने का यह प्रयोग नाकाम रहा।
आरपी/एमजे (डीपीए)

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