बच्चों को ऐसे सिखाएं हावभाव से भाषा

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Last Updated: सोमवार, 8 सितम्बर 2014 (11:37 IST)
आमतौर पर माना जाता है कि बच्चों में जल्दी सीखने की क्षमता होती है। बच्चों के मानसिक विकास के लिए हम कई तरीके अपनाते हैं। एक अध्ययन के हिसाब से इन तरीकों में 'जेसचर्स' यानी स्वत: इशारे बच्चों को भाषा सीखनें में काफी मददगार हो सकते हैं। स्वत: यानी अपने आप होने वाले इन इशारों से बच्चों को स्पोकन लैंग्वेज और साइन लैंग्वेज़ को सीखने में आसानी होगी। बच्चे अपनी बात कहने के लिए स्वाभाविक इशारों से अपनी बात ज्यादा आत्मविश्वास से कह पाते हैं।
जानें भाषा में इशारों का महत्व..


बच्चों की अभिव्यक्ति करें प्रभावी :
यूनिवर्सिटी ऑफ़ शिकागो के की प्रोफ़ेसर सुसैन गोल्डिन के मुताबिक हाथों के इशारों और शब्दों का संयोजन बच्चों को उनकी बात एक प्रवाह में कहने में मदद करता है। इस अध्ययन के नतीजों से पता चलता है कि बोलने से पहले बच्चों को अपने विचारों को समझने में आसानी होती है जिससे वे खुलकर अपने आप को व्यक्त कर पाते हैं। इस अध्ययन में सुसैन ने जांचा की इशारे किस तरह बच्चों में भाषा को सीखने में मदद करते हैं। उनके मुताबिक स्वत: इशारे भाषा को समझने का एक आसान तरीका है और कोई भी बातचीत करने के लिए उसका उपयोग कर सकता है। यही नहीं, जरूरत पड़ने पर कई मौकों पर ये इशारे ही खुद एक भाषा का रूप ले लेते हैं।
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