‘सबकी लाडली बेबो’ के कंवलजीतसिंह उर्फ कूकू नारंग फादर्स डे के अवसर पर संदेशपिता बन चुके सभी लोगों के लिए मेरा यही संदेश है कि अपने बच्चों के साथ मित्रवत व्यवहार करें, जिससे वे विश्वासपूर्वक आपके समक्ष अपनी बातों को रख सकें, अपनी भावनाओं का इजहार कर सकें। हालाँकि पिता-पुत्र के बीच एक मर्यादा की सीमा रेखा भी अवश्य बनी रहनी चाहिए और इसका उल्लंघन नहीं किया जाना चाहिए। पर्दे पर और पर्दे के पीछे पिता के किरदार में अंतरअंतर बस इतना है कि शूटिंग के दौरान आप अपने ऑन स्क्रीन बच्चों के साथ शूटिंग के समय अभिनय करते हैं और फिर अपने घर चले जाते हैं वास्तविक जिंदगी में अपने बच्चों के पास। ‘यह रिश्ता क्या कहलाता है’ में अक्षरा के पिता, संजीव सेठफादर्स डे के अवसर पर संदेश अपने बच्चों के साथ एक अच्छे दोस्त की तरह पेश आएँ। किसी भी बात पर उन पर नाराज होने से पहले उन्हें और उनकी भावनाओं को समझने की कोशिश करें। अपने बच्चों को बेहतर तरीके से जान पाने के बाद ही आप अच्छे पिता बन सकते हैं। जब अत्यंत आवश्यक हो, तभी उनके साथ सख्ती से पेश आएँ।पर्दे पर और पर्दे के पीछे पिता के किरदार में अंतर दोनों भूमिकाओं में जमीन-आसमान का अंतर है। रील लाइफ में आप अभिनय कर रहे होते हैं, किंतु असली जिंदगी में यह आपकी जिम्मेदारी है कि आप बच्चों की सही प्रकार से परवरिश करें। हालाँकि जब आपको काफी लंबे समय तक ऑन स्क्रीन बच्चों के साथ काम करना पड़ता है तो आप उनसे अपने बच्चों की तरह ही व्यवहार करने लगते हैं। ‘अमूल वाइस ऑफ इंडिया - मम्मी के सुपर स्टार्स’ के मेजबान अली असगर फादर्स डे के अवसर पर संदेश मेरा मानना है कि परिवार में पिता की भूमिका नगण्य होती है क्योंकि यह कहा जाता है कि ‘माँ के पैरों के नीचे जन्नत होती है।‘ किंतु मेरा दृढ़ विश्वास है कि बच्चों की जिंदगी में पिता का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान होता है। सभी पिता को यही संदेश देना चाहता हूँ कि अपने बच्चों के साथ लो-प्रोफाइल में बने रहें और अपने कर्तव्यों का बखूबी निर्वाह करें। कौन जानता है कि एक दिन दुनिया यह कहना शुरू कर दें कि ‘बाप के हाथों के नीचे जन्नत होती है।‘ |