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स्विट्जरलैंड : स्वर्गलोक की सैर
गायत्री शर्मा
- मेघना असेरकर

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स्विट्जरलैंड बेशक योरप का सबसे सुंदर देश है। यहाँ की घड़ियाँ और चॉकलेट्स पूरी दुनिया में प्रसिद्ध हैं। मैं एवं मेरे पति ने हमारी शादी की २५वीं सालगिरह स्विट्जरलैंड में मनाने का निर्णय लिया। हमने दुबई से स्विस एयर की रात की १.३० बजे की फ्लाइट ली, जिससे हम सुबह ६.३० बजे ज्यूरिख पहुँचे।

हवा काफी ठंडी और सुहानी थी। हमारे दिन की शुरुआत एक पर्यटक स्थल राईन फॉल से हुई। हम ट्रेन से विन्टरथर गए और वहाँ से दूसरी ट्रेन के द्वारा हम राईन फॉल पहुँच गए। ट्रेन के बाहर का नजारा देखते ही बनता था।

सुंदर, छोटे और साफ-सुथरे गाँव, सभी दूर हरियाली देखकर बहुत अच्छा लगा। कवेलूदार मकान, बाहर घास चरती गायें और सुंदर रास्ते देखकर ऐसा लगा कि ये नजारा कभी खत्म ही न हो। राईन फॉल स्टेशन पर पानी की जोरदार आवाज सुनकर मालूम पड़ा कि वॉटर फॉल पास में ही है और हम नीचे उतरने लगे। पूरा रास्ता हरे और घने जंगलों में से था। जैसे ही हम नीचे उतरे, सामने का नजारा देखकर दिल खुश हो गया। राईन फॉल हमारे सामने था। यह योरप का सबसे बड़ा झरना है। पानी में बहुत सारे इंद्रधनुष बने हुए थे, जिससे दृश्य का सौंदर्य दोगुना हो गया।

  स्विट्जरलैंड के बर्फीले पहाड़, चारों तरफ कालीन की तरह फैली हुई हरियाली, रंग-बिरंगे फूल, चरती हुई गायें, पहाड़ों में गूँजती उनकी काउबेल्स, स्वच्छ-सुंदर रास्ते और आरामदायक ट्रेन्स, इस देश की जितनी तारीफ करें, वह कम ही है।      
वहाँ से हम वापस ट्रेन द्वारा ज्यूरिख पहुँचे और स्विस भोजन का आनंद लिया। यहाँ तरह-तरह की चीज, केक्स, ज्यूसेस, फ्रूट्स और ब्रेड्स मिलते हैं। दूसरे दिन हम लूजर्न के लिए निकले। यहाँ की ट्रेंस बहुत तेज, साफ और आरामदेह होने के कारण सफर से थकान बिलकुल नहीं होती। लूजर्न का हमारा होटल काफी अच्छा था। थोड़ा आराम करके शाम को हम यहाँ का प्रसिद्ध लेक लूजर्न और चैपल ब्रिज देखने निकले, जो रेलवे स्टेशन के सामने है।

चैपल ब्रिज चौदहवीं सदी में बनाया गया था। यह नगर की सुरक्षा के लिए सेंट पीटर चैपल के नाम पर बनाया गया। यह पूर्णतः लकड़ी का बना हुआ पुल है, जिसके दोनों तरफ सुंदर और रंग-बिरंगे फूलों की साज-सज्जा है। पुल ऊपर से ढँका हुआ है और अंदरूनी हिस्से से लूजर्न नगर के इतिहास को दर्शाते हुए सुंदर चित्र बने हुए हैं। अगले दिन हम माउंट पीलेटस के लिए निकले, जो कि यहाँ का सबसे बड़ा आकर्षण है।

हमारी ट्रिप लेक लूजर्न से बोट द्वारा शुरू हुई। बीच में सुंदर गाँव, पहाड़, हरियाली आदि देखते हुए हम कॉगविल रेलवे स्टेशन पहुँचे। यह ट्रेन ऊँचे पहाड़ों पर जाती है। यह पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा चढ़ाई पर चढ़ने वाली ट्रेन है। माउंट पीलेटस बहुत सुंदर जगह है। यहाँ आधे दिन के टूर का हमने आनंद लिया। फिर केबल कार से वापस लूजर्न पहुँचे। केबल कार की यात्रा बहुत ही रोमांचक है, क्योंकि ७००० फुट की ऊँचाई से आप मिनटों में जमीन पर आते हैं।

चौथे दिन हम गोल्डन पास पेनोरेमिक ट्रेन से इंटरलाकन के लिए निकले। शहर के दोनों तरफ काफी बड़े लेक्स हैं। इंटरलाकन वेस्ट और इंटरलाकन ईस्ट नाम से रेलवे स्टेशन हैं और बीच में शहर है, जो बहुत सुंदर है। चारों ओर रंग-बिरंगे फूल और हरियाली है। हम लेक्स पर घूमने गए और शहर में पैराग्लाइडिंग का आनंद उठाया। यहाँ के काउबेल्स, घड़ियाँ, परफ्यूम्स और चॉकलेट्स किसी को उपहार देने के लिए बहुत प्रसिद्ध हैं।

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इंटरलाकन का दूसरा दिन हमारी ट्रिप का सबसे रोमांचकारी दिन था। हम सुबह जल्दी जुंगफ्राउ के लिए निकले, जो कि आल्पस पर्वतों में स्थित है। यह योरप की उच्चतम चोटी है। इसकी ऊँचाई ११,३३३ फुट है। यहाँ जाने के लिए बहुत ही आरामदायक ट्रेंस हैं और चारों तरफ का दृश्य देखते हुए समय कहाँ निकल जाता है, मालूम ही नहीं पड़ता।

कई बार बाहर के दृश्य देखकर यश चोपड़ा की फिल्मों की याद ताजा हो जाती है। इंटरलाकन से जुंगफ्राउ ढाई घंटे का सफर है। आखिरी आधा घंटा ट्रेन पूरी तरह बर्फ के पहाड़ों के अंदर से गुजरती है।

जुंगफ्राउ पीक पर व्यू पाइंट्स बनाए गए हैं। वहाँ का स्फींक्स ऑब्जर्वेशन हॉल और टेरेस देखते ही बनता है। आइस पैलेस भी बहुत सुंदर है। जहाँ देखो बर्फ की सफेद चादरें, उस पर स्कीइंग करते लोग व बर्फ पर घूमने वाले पर्यटक देखकर मन प्रसन्न हो उठा। बर्फ स्लेज में घूमने का अपना ही मजा है। यह इंटरलाकन से पूरे दिन की ट्रिप है। दिनभर बर्फ में घूमने के बाद काफी भूख लगी थी।

योरप की उच्चतम चोटी पर बॉलीवुड रेस्टॉरेंट देखकर मन खुश हो गया। काफी दिनों के बाद भारतीय व्यंजन का स्वाद कुछ ज्यादा ही अच्छा लगा। यहाँ पर बढ़िया बुफे लंच मिलता है। चटपटे छोले, दो-तीन तरह की सब्जियाँ, चावल कुछ ज्यादा ही खाना हो गया। यहाँ पर भारतीयों के साथ काफी योरपीय लोग भी खाने का आनंद उठाते हैं। उनके लिए यह खाना काफी तीखा होने के बावजूद ये इसे पसंद करते हैं। वहाँ पर हमें इटेलियन, ब्रिटिश तथा जर्मन परिवार मिले।

  जुंगफ्राउ पीक पर व्यू पाइंट्स बनाए गए हैं। वहाँ का स्फींक्स ऑब्जर्वेशन हॉल और टेरेस देखते ही बनता है। आइस पैलेस भी बहुत सुंदर है। जहाँ देखो बर्फ की सफेद चादरें, उस पर स्कीइंग करते लोग व बर्फ पर घूमने वाले पर्यटक देखकर मन प्रसन्न हो उठा।      
अगले दिन हम इंटरलाकन से मॉन्त्रो के लिए निकले। यह ट्रेन पूरी तरह पारदर्शी है। गोल्डन पास पेनोरेमिक ट्रेन में सफर करना अपने आप में एक सुखद अनुभव है। तीन घंटों के सफर के बाद हम मॉन्त्रो शहर पहुँचे।

यहाँ का जिनेवा लेक विश्व प्रसिद्ध है। इसे स्विस रिविएरा कहते हैं। हमारा होटल स्विस रिविएरा पर था, जिसका नाम यूरोटेल रिविएरा था। मॉन्त्रो से हमने आधे दिन का क्रूज लिया। यहाँ पर फ्रेन्च ज्यादा बोली जाती है।

यहाँ का ओल्ड टॉउन फ्रेडी मर्क्युरी मेमोरियल, केसल चिलियाँ देखने लायक हैं। यहाँ के चाकलेट्स एवं ट्रेन पूरी दुनिया में प्रसिद्ध हैं। इनको जोड़कर बनती है, यहाँ की चॉकलेट ट्रेन। यह मॉन्त्रो ओबेरलैंड और बर्नुआ जाती है। कॉफी एवं केक्स का आनंद लेते हुए ट्रेन से बाहर सुंदर हरे-भरे अंगूर के बागान देखे जा सकते हैं। यह ट्रेन आपको ग्रुएर ले जाती है।

यहाँ पूरे गाँव में चीज बनता है, इसे चीज मेकिंग टाउन कहते हैं। इस ट्रेन में हम ब्रोक गए, जहाँ विश्व प्रसिद्ध नेस्ले चॉकलेट फैक्टरी स्थित है। यहाँ हमने स्विस चॉकलेट्स खाए एवं खरीदे। यह मीठी यात्रा खत्म करके हम शाम को मॉन्त्रो लौटे। शाम को जिनेवा लेक पर चहलकदमी का आनंद उठाया। उसके बाद स्विस हिनर का लुत्फ उठाया।

अगले दिन हम सुबह जल्दी मॉन्त्रो ज्यूरिख ट्रेन में बैठे, क्योंकि हमें दोपहर 1 बजे की ज्यूरिख-दुबई फ्लाइट पकड़नी थी। स्विट्जरलैंड के बर्फीले पहाड़, चारों तरफ कालीन की तरह फैली हुई हरियाली, रंग-बिरंगे फूल, चरती हुई गायें, पहाड़ों में गूँजती उनकी काउबेल्स, स्वच्छ-सुंदर रास्ते और आरामदायक ट्रेन्स, इस देश की जितनी तारीफ करें, वह कम ही है। यहाँ के लोग काफी मिलनसार एवं दोस्ताना व्यवहार वाले है। कभी मौका मिले तो आप भी अपने परिवार एवं दोस्तों के साथ स्विट्जरलैंड की यात्रा जरूर करें।
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