कितनी बचत करें कि 35 साल में रिटायर हो जाएं

chris stokel walker
पुनः संशोधित सोमवार, 12 नवंबर 2018 (11:35 IST)
- क्रिस स्टोकल-वॉकर

इस दुनिया में कई लोग लगातार काम कर रहे हैं और बहुत कंजूसी से जी रहे हैं ताकि वे 40 साल या उससे भी कम में हो सकें।- क्रिस स्टोकल-वॉकर

1981 में जब बार्नी व्हाइटर सेकेंडरी स्कूल में गए तब उनके माता-पिता ने अपना घर खरीदा था। वह कहते हैं, "उन्होंने आम ब्रिटिश की तरह काम किया। बड़ा घर, बड़ा कर्ज़।" उसके तुरंत बाद मंदी आई और ब्याज दर 17 फ़ीसदी तक पहुंच गई।


व्हाइटर के माता-पिता को खर्चों में कटौती करनी पड़ी ताकि वे कर्ज़ के बढ़ते ब्याज को चुका सकें। छुट्टियां रद्द कर दी गईं। पेपर की डिलीवरी भी बंद करा दी गई। व्हाइटर के पिता ने बीयर खरीदना बंद कर दिया और अपने लिए खु़द बीयर बनाने लगे। पैसे को लेकर व्हाइटर का नज़रिया भी हमेशा के लिए बदल गया।

वह कहते हैं, "मेरी समझ में आ गया कि बैंक से कर्ज़ लेना ख़तरनाक है।" बर्नी व्हाइटर ने अपना वयस्क जीवन यह सुनिश्चित करने में बिताया कि उन्हें अपने माता-पिता जैसी स्थिति का सामना न करना पड़े।


उन्होंने अर्थशास्त्र में डिग्री ली और चार्टर्ड एकाउंटेंट का प्रशिक्षण लिया। इस पेशे में वह पैसे की भाषा सीख गए। उन्होंने 20 वर्षों तक फाइनेंस में काम किया। डिग्री लेकर नौकरी शुरू करने पर मिलने वाली तनख़्वाह 12,500 पाउंड (16 हजार डॉलर) से बढ़ती गई, लेकिन उनकी जीवनशैली नहीं बदली।

दो दशक से ज़्यादा समय तक व्हाइटर ने अपनी तनख़्वाह का कम से कम आधा हिस्सा रिटायर होने के लिए बचाया। उन्होंने बोनस के पैसे भी में डाले। व्हाइटर ट्यूब की जगह साइकिल से दफ्तर गए और शराब पर खर्च को कम किया।


व्हाइटर अभी 48 साल के हैं। उनकी बचत ने उन्हें 43 साल की उम्र में रिटायर होने के लिए सक्षम बना दिया। रिटायर होने के करीब एक साल पहले उन्होंने कनाडा के 44 वर्षीय लेखक पीटर एडनी का ब्लॉग "Mr. Money Mustache" पढ़ा। पीटर एडनी जल्दी रिटायर होने वालों के बीच विश्वसनीय सेलिब्रिटी हैं।

व्हाइटर ने महसूस किया कि वह अवचेतन रूप से दुनिया भर के युवा श्रमिकों के बीच लोकप्रिय हो रहे एक आंदोलन का हिस्सा थे। यह आंदोलन है फ़ायर (FIRE- Financial Independence, Early) यानी वित्तीय आज़ादी, जल्दी सेवानिवृत्ति।


फ़ायर की शुरुआत
फ़ायर (FIRE) आंदोलन का बुनियादी सांचा कुछ इस तरह है- इसके समर्थक जितना संभव हो उतना कम खर्च करते हैं। उम्र के 20 वर्ष और 30 वर्ष के दशक में वे अपनी आमदनी का आधा या उससे ज़्यादा बचत करते हैं।उनका लक्ष्य 30 वर्ष के दशक या हद से हद 40 वर्ष के दशक में रिटायर हो जाना होता है।

जल्दी रिटायर होने का मतलब यह नहीं है कि 50 साल का होने पर वे ब्रिज खेलें या क्रूज़ पर छुट्टियां बिताएं। उनका फ़ोकस वित्तीय आज़ादी पर रहता है। उनका लक्ष्य सादा जीवन जीते हुए बचत करने का होता है जिससे आने वाले दशकों में कॉरपोरेट नौकरी में तनख़्वाह बढ़ोतरी और तरक्की के पीछे भागने और बैंक के कर्ज़ को चुकाने की चिंता किए बगैर कुछ और कर सकें।


वैसे तो ये विचार कई वर्षों से मौजूद रहे हैं, लेकिन ऑनलाइन समुदायों ने पिछले एक दशक में फ़ायर (FIRE) आंदोलन की जड़ें जमा दी हैं। यह सबसे पहले अमरीका में लोकप्रिय हुआ था। इसकी जड़ें 1990 के दशक के न्यूज़लेटर 'दी टाइटवाड' गैजेट में हैं।

इस न्यूज़लेटर का आखिरी पेपर संस्करण दिसंबर 1996 में छपा था, लेकिन किफ़ायत का यह आंदोलन ऑनलाइन चलता रहा, खासकर 2008 के वित्तीय संकट के लंबे हैंगओवर के दौरान। आज दुनिया भर के हजारों लोग इसके पॉडकास्ट और ब्लॉग के सब्सक्राइबर हैं। वे कम खर्च में ज़िंदगी कैसे बिताई जाए, इस पर चर्चा करते हैं।


फ़ायरड्रिल नाम के एक पॉडकास्ट के हर एपिसोड को 7000 से अधिक बार डाउनलोड किया गया है और यह अमेरिका में एप्पल की निवेश पॉडकास्ट की टॉप-100 सूची में शामिल है। ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, नीदरलैंड्स और भारत में रेडिट पर कुछ विशिष्ट मंच हैं, जहां लोग टिप्स शेयर करते हैं और सलाह मांगते हैं।

दूसरों से अलग
इन समुदायों के युवा सदस्य अपनी रिटायरमेंट की बचत को लेकर जुनूनी हैं। वे ट्रेंड को पलट रहे हैं। 21वीं सदी में जवान हुए ज्यादातर मिलेनियल्स रिटायरमेंट के लिए बचत नहीं कर रहे हैं।


अमेरिका में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑन रिटायरमेंट सिक्योरिटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक दो तिहाई मिलेनियल्स ने रिटायरमेंट के लिए कुछ नहीं बचाया है। यूएस फेडरल रिजर्व के आंकड़े दिखाते हैं कि 35 साल से कम के 58 फ़ीसदी लोगों के पास रिटायरमेंट खाता नहीं है।

रॉयल लंदन की पेंशन विशेषज्ञ हेलेन मोरिसे ने पिछले साल ब्रिटेन के 1500 मिलेनियल्स का सर्वे किया और पाया कि वे अपनी आमदनी का औसत 4.6 फ़ीसदी रिटायरमेंट के लिए बचा रहे हैं। मोरिसे कहती हैं, "यह प्रचलित सिद्धांतों में सुझाए गए 12-15 फ़ीसदी बचत से बहुत कम है।"


फ़ायर (FIRE) आंदोलन के अनुयायियों के लिए इतना भी कम है। 12 से 15 फ़ीसदी बचत दर से रिटायरमेंट फंड तैयार करने में दशकों लग जाएंगे। जल्दी रिटायर होने के लिए कई लोग अपनी आमदनी का आधा या उससे भी ज़्यादा बचत करते हैं और बस उतना ही खर्च करते हैं जितने में काम चल जाए।

थोड़े में गुजारा
क्रेग क्योरलोप इसी तरह का जीवन जीते हैं। 25 साल के वित्तीय विश्लेषक के पास एक कार है, लेकिन वह इसे कभी नहीं चलाते। उन्होंने इसे टूरो नाम की साइट को किराये पर दे रखा है और खुद एक बाइक चलाते हैं।


वह कहते हैं, "मैंने ऐसा किया और एक महीने में कुछ सौ डॉलर कमाए।" क्योरलोप कोलोराडो के डेनवर में रहते हैं। वह अपना बेडरूम भी किराये पर दे देते हैं और लिविंग रूम में सो जाते हैं।

"मैंने लिविंग रूम में एक डिवाइडर और पर्दा डालकर एक कामचलाऊ बेडरूम तैयार कर लिया। इस तरह मैं एक साल रहा।" उन्होंने इतनी बचत कर ली है कि अप्रैल 2017 में डेनवर में एक डुप्लेक्स खरीदने के बाद इस साल जून में उन्होंने दूसरा घर खरीदा। यहां वह एक कमरे में रहते हैं और बाकी को किराये पर लगा दिया है।


"अभी मैं हर महीने 3000 से 4000 डॉलर बचा रहा हूं। 18 महीने पहले जब से मैंने पहला घर किराये पर दिया है तब से शायद मैंने 60 से 70 हजार डॉलर बचाए होंगे।" इस तरह की ज़िंदगी के आलोचक भी कम नहीं हैं। कुछ को लगता है कि फ़ायर (FIRE) के अनुयायी जितनी बचत करना चाहते हैं, वह मुमकिन नहीं है।

लंदन में रहने वाले वित्तीय नियोजन सलाहकार डैमियन फ़ाही कहते हैं, "मुझे लगता है कि यह एटकिन्स डायट का चरम संस्करण है। उनके पास वित्तीय नियोजन की कई सकारात्मक चीजें हैं, लेकिन यह सभी के लिए ठीक हो यह ज़रूरी नहीं।" रॉयल लंदन की मोरिसे इससे सहमत हैं। वह कहती हैं, "उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि वे अन्य ज़रूरतें भी पूरी कर सकें।"


जीने का हिसाब-किताब
फ़ायर (FIRE) का एक और विवादित पक्ष यह है कि 30 या 40 साल की अवस्था में रिटायर होने के लिए कितने पैसों की ज़रूरत है? आलोचकों का कहना है कि इसके अनुयायी ज़रूरी बचत को बहुत कम करके आंकते हैं।

कई लोग (सभी नहीं) 4 फ़ीसदी के सिद्धांत पर चलते हैं। इसके मुताबिक हर साल निवेश का 4 फ़ीसदी हिस्सा निकालने से आपकी आमदनी में ज़्यादा हिस्सा ब्याज और लाभांश का होगा और आपकी मूल राशि बनी रहेगी।


मोटे तौर पर ज़रूरी खर्च का 25 गुना बचत करने की ज़रूरत होती है। उदाहरण के लिए यदि किसी को सालाना 30 हजार पाउंड (39 हजार डॉलर) की ज़रूरत है तो उसे 600,000 पाउंड (771,000) की बचत चाहिए। इस नियम में कुछ गड़बड़ियां है, विशेषकर तब जब इसे युवाओं पर लागू किया जाता है।

सामान्य तौर पर इस नियम को उन बुजु़र्गों पर लागू किया जाता है, जो 60 साल में रिटायर हो रहे हैं और जिन्हें 30 साल से ज़्यादा समय तक पैसे की ज़रूरत नहीं पड़ने वाली। कंज्यूमर फाइनेंशियल वेबसाइट बोरिंग मनी (Boring Money) की संस्थापक होली मैके कहती हैं कि गणित में इसका ख़याल नहीं रखा गया है।


"यदि आप 30 साल की उम्र में रिटायर हो रहे हैं तो आप 70 साल और जी सकते हैं। मुझे लगता है कि यहां बहुत भोलापन है।"... मैके कहती हैं कि 35 साल की उम्र में रिटायर होने के लिए किसी को कितने पैसे की ज़रूरत है, इसका ठीक-ठीक हिसाब लगाना मुश्किल है।

यदि किसी को हर साल 20 हजार पाउंड चाहिए तो पूरी ज़िंदगी में उसे इसके 55 गुना रकम की ज़रूरत होगी। पूरी बचत का निवेश किया जाए तो कम रकम की ज़रूरत होगी।... "रकम कम से कम 5 लाख पाउंड हो तब आपको साल में सिर्फ़ 20 हजार पाउंड मिलते हैं।"


ब्रिटेन में रहने का ख़र्च बहुत ज़्यादा है। ओएनएस (ONS) के मुताबिक चार लोगों के एक परिवार का औसत सालाना खर्च 39 हजार पाउंड (50 हजार डॉलर) है। मैके के 55 गुना बचत के नियम से गणना करें तो 35 साल की उम्र में रिटायर होने के लिए किसी को 21.5 लाख पाउंड (27।5 लाख डॉलर) की ज़रूरत होगी।

खर्च कम करो, बंद नहीं
ऊपर जो हिसाब लगाया गया है उसमें माना गया है कि जो व्यक्ति 35 साल की उम्र में रिटायर हो रहे हैं वे कोई काम नहीं करेंगे। फ़ायर (FIRE) आंदोलन के ज़्यादातर अनुनायियों पर यह लागू नहीं होता।


अमेरिका की ग्वेन मेर्ज़ 28 साल की हैं और उनके पास दो लाख डॉलर की बचत है। इसका ज़्यादा हिस्सा संपत्ति, शेयर में है और थोड़ी नगदी है। मार्च में जब वह 27 साल की थीं, तब उन्होंने आईटी की नौकरी छोड़ दी। अब वे फ़ायरड्रिल पॉडकास्ट को होस्ट करती हैं।

मेर्ज़ कहती हैं, "मैं रिटायर नहीं हूं। मेरे पास अब भी काम है लेकिन मुझे अपनी पसंद का काम चुनने की आज़ादी है, भले ही उससे ज़्यादा पैसे ना मिलें।"


मेर्ज़ को उम्मीद है कि जब वह काम करना बंद कर देंगी, तब उनका निवेश उन्हें ज़िंदगी जीने लायक आमदनी दिलाएगा। उनके लिए फ़ायर (FIRE) का मतलब सिर्फ फाइनेंस नहीं है। यह सहयोग और दोस्ती बढ़ाता है। "आपके साथ उठने-बैठने वाले कई लोग हैं और वे इस वजह से नाक-भौं नहीं सिकोड़ते कि आप 13 साल पुरानी कार चलाते हैं।"

मेर्ज़ अपनी जीवन-शैली को साधारण रखने के लिए सिर्फ़ पुरानी कार का इस्तेमाल नहीं करतीं। उनको निन्टेंडो स्विच पसंद है, लेकिन वे इस गेम को गैरज़रूरी मानती हैं। वह खाना खाने बाहर कम जाती हैं और ज्यादा सफ़र भी नहीं करतीं। क्या फ़ायर (FIRE) के आलोचक इस पर विचार नहीं करते कि यह सब दीर्घकालिक फ़ायदे के लिए थोड़े दिनों के कष्ट हैं?


मेर्ज़ कहती हैं, "वे इस चीज़ को मिस कर रहे हैं। यदि आप खुद को बहुत ज़्यादा सता रहे हैं तो आप खुश नहीं रहेंगे, न ही इस चीज़ को जारी रख पाएंगे।" मेर्ज़ की सलाह है कि गैरज़रूरी खर्चों में उतनी ही कटौती करें जिससे तकलीफ़ न हो। "आपको अपनी ज़िंदगी सबसे अच्छे तरीके से जीनी चाहिए लेकिन इसका मतलब नहीं कि आप ढेर सारे पैसे खर्च करें।"

व्हाइटर इससे सहमति जताते हैं, "आपको महंगे सिटी सेंटर बार में जाने की ज़रूरत नहीं हैं। आप कम खर्च में भी अपने दोस्त के साथ बैठ सकते हैं।" व्हाइटर ने 5 लोगों के अपने परिवार पर इसे लागू किया है। रिटायर होने से पहले उन्होंने महसूस किया कि उनका परिवार सालाना 24 हजार पाउंड (31 हजार डॉलर) में अच्छे से रह सकता है।


"हम उपभोक्तावाद के पीछे भागते हुए बच्चों को सबसे नया आई-फोन नहीं दिलाते।" व्हाइटर अपनी जीवनशैली को मितव्ययी बताते हैं, वंचित नहीं। "रिटायरमेंट के बाद 20 साल दयनीय ज़िंदगी के लिए 20 साल तकलीफ़ उठाने का कोई मतलब नहीं है।"

आज़ादी के लिए काम
फ़ायर (FIRE) आंदोलन के जल्दी रिटायर होने के लक्ष्य के बावजूद मेर्ज़ और व्हाइटर 27 या 43 साल में अपना काम नहीं छोड़ रहे, ना ही वे जीवन भर कुछ करेंगे ही नहीं।


मेर्ज़ कहती हैं, "हम दिन भर बैठकर माइ ताइ (कॉकटेल) नहीं पिएंगे। आदमी को काम करने की आंतरिक ज़रूरत होती है। हम समाज के मूल्यवान सदस्य के रूप में महसूस करना चाहते हैं और यह इस वजह से नहीं रुकना चाहिए कि बैंक में आपके पास कितनी रकम है।"

यह आंदोलन उन्हें इस बात की आज़ादी देता है कि वे जो करना चाहते हैं वे करें। कुछ लोग घूमना पसंद करते हैं, स्वाभाविक है सस्ते में। कुछ दूसरे लोग हम्सटर व्हील में फंसने की जगह अपनी पसंद से अपना काम चुनते हैं।


व्हाइटर कहते हैं, "मुझे लगता था कि मैं सिस्टम में फंस गया हूं। लगता था जैसे मैं किसी जेल शिविर में हूं और एक ऐसी जीवनशैली को बनाए रखने के लिए काम कर रहा हूं जिसे मैं पसंद नहीं करता।" अब वह मुक्त हैं। "बहुत सारी चीजें भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक हैं। इसकी ताक़त को समझने के लिए आपको इसे जीकर देखना होगा।"

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