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जानिए क्यों पहनें पुखराज रत्न...

को संस्कृत में पुष्पराग, हिन्दी में पुखराज कहा जाता है। यह से संबंधित रत्न है। चौबीस घंटे तक दूध में रखने पर यदि क्षीणता एवं फीकापन न आए तो असली होता है।

जीवन में भाग्यवृद्धि, सुख-सौभाग्य, विकास-उन्नति, समृद्धि, पुत्र कामना, विवाह एवं आध्यात्मिक समृद्धि हेतु पुखराज धारण करना चाहिए। 
 
गुरु ग्रह जीवनदाता है। यह वसा एवं ग्रंथियों से संबंध रखता है। अतः यह गला रोग, सीने का दर्द, श्वास रोग, वायु विकार, टीबी, हृदय में धारण करने से लाभप्रद होता है।
 
पुखराज पांच रंगों में पाया जाता है- हल्दी रंग में, केशर/केशरिया, नींबू के छिलके के रंग का, स्वर्ण के रंग का तथा सफेद-पीली झांई वाला।
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